उत्तराखंड में विज्ञान दिवस सयाणी काकी की जुबानी

उत्तराखंड में विज्ञान दिवस सयाणी काकी की जुबानी
Spread the love

देहरादून। अलग राज्य उत्तराखंड के लिए मोण धौण एक साथ रखकर देख चुकी सयाणी काकी का उत्तराखंड का दौरा जारी है। जोशीमठ भू-धंसाव पर सिस्टम को खरी-खरी सुनाने वाली काकी अब सभी धाणी देहरादून के रंग-ढंग से पितली गिच्ची जिम्मेदारों की पितृ पूजन पर उतर आई है। इसकी शुरूआत विज्ञान दिवस से हो गई।

फसक मारकर पहाड़ों के स्कूल/कॉलेज छोड़कर देहरादून की लुकण गली पोस्ट हथियाने प्रतिनियुक्ति/संबद्ध आदि… आदि। सयाणी काकी ने उत्तराखंड की नीव अपने सामने पडते देखा है, गोली खाते लोगों को अपने सामने गिरते देखा है। खुद बढ चढ कर और लाठी,गोली, डंडे खाकर उत्तराखंड आंदोलन में कूदी हैं।
सयाणी काकी के चहरे पर पडी झुर्रियां और आक्रोश उस बात को बिना कहे ही कह देता है जिस उत्तराखंड को बनाने के लिए उन्होंने कल्पना की थी उस उत्तराखंड में वे शांति से रह पा रहे हैं।

आज विज्ञान दिवस था, सयाणी काकी अपनी कंद्राओं से निकले लगभग दो से तीन माह हो गए हैं। जगह जगह रुक के दाणें सयाणों से बात करते हुऐ होटलों में बीडी सुलकाते हुऐ अपनी यात्रा पर आगे बढती है।

कुछ दिनों से सयाणी काकी राजधानी में है, पुराने लोगों को खोजते  उत्तराखंड आंदोलनकारियों को खाजते हुऐ उनसे मिलना, उनसे बातें करना व उस दौर के विषयों पर चर्चा करके दाणें सयाणों व लोगों से राजधानी की व्यथा कथा भी सुन रही है।

 सयाणी काकी अपने किन्हीं रिश्तेदारों के घर पहुंची तो वहां छोटे बच्चे ये कहते हुए तैयार हो रहे थे कि विज्ञान दिवस में फलां जगह जाना है। काकी ने कान खड़े करके बच्चों से विज्ञान दिवस की सुनी। अपनी आंख्यूं को इधर-उधर घुमाया और गहरी सांस ली। फिर राज्य के ज्ञान/विज्ञान पर कुछ बुदबुदाई। 

सायणी काकी को पुराने दिन याद आने लगे जब उत्तराखंड की नीव पडने के साथ उत्तराखंड में कुछ वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना भी की थी। सायाणी काकी याद दिलाती है कि उस दौर में उत्तराखंड उछलता खेलता हुआ संघर्षों को झेलता हुआ आगे बढ रहा था।

उत्तराखंड में वैज्ञानिक संस्थान भी यद्यपि फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट हो चाहे वाईल्ड लाईफ इन्स्टीट्यूट निसंदेह दुनिया के नामचीन संस्थानों में से है और उनके अंदर काम करने वाले वैज्ञानिक भी।

इसी तरीके से उत्तराखंड राज्य बनने के बाद जिस प्रकार से उत्तराखंड के वैज्ञानिक संस्थान अपने अस्तित्व में आए और वह लोग जिन्होंने इनको लाने के लिए, इन्हें स्थापित करने के लिए बहुत मेहनत की वो दौर सयाणी काकी याद करती है।

 सयाणी काकी की दो टूक है कि आज विज्ञान के नाम पर इन संस्थानों में ऐसे ऐसे लोग बैठे हैं जो बाल बच्चों को स्कूल कॉलेजों में पढ़ाना छोड़ कर के देहरादून और घंटाघर के मजे ले रहे हैं। गाड़ियों में चक्कर लगा रहे हैं और सत्ता शासन के आगे चापलूसी करकर यहीं जमें हुऐ व चिपके हुऐ हैं ।

उत्तराखंड में विज्ञान को आगे बढ़ाने का जिन लोगों ने काम किया उन को पीछे धकेल दिया जा रहे हैं और ऐसे लोग जो अपने प्रतिनियुक्ति प्रतिनियुक्ति के कर फिल्मी सितारों जैसे बने हुऐ हैं। उक्त लोगों ने न जाने राज्य निर्माण के लिए कैसा संघर्ष किया कि आज वो ही दिख रहे हैं। कुटंबदारी की कुटंबदारी जमी हुई है।  राज्य  के अन्दर तमाम  एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक देश में है जो कि प्रदेश को एक अच्छी दिशा दे सकते हैं, उनको नहीं लाया जाता है। सयाणी काकी का सवाल है क्यों?

सायाणी काकी बहुत आक्रोशित है कि ऐसे गलत लोगों को कुर्सी दे कर  उत्तराखंड का अपमान है क्योंकि जो भी लोग सिफारिश और घूस रिश्वत देकर कुर्सियों में बैठे हैं, उनको भी वहां से फरकाना चाहिए।

सयाणी काकी कहती है जय विज्ञान जय उत्तराखंड और आने वाले समय में भूकंप की भविष्यवाणी चेता रही है। मेरे प्यारे उत्तराखंड के सरकार चला रहे भाइयों बहनों जो भी हो, सब की धाणी छोड़ छाड़ के तब जनता की जान को बचाने के लिए लग जाओ। खाली विज्ञान के नाम पर ढकोसले न करो।

ऐसे विज्ञान निकालो जिससे यहां एक भी जान न जाए। जितने बड़े मैदान हैं, उनको ऐसा बना दो कि लोग भाग कर साथ खड़े हो सके, खाने पीने की व्यवस्था करो और अभी से जो चेतावनी मिल रही है। उसके लिए लामबंद हो जाओ सभी धाणी समारोह सम्मान समान यह सब रीबन काटने छोड़ो और तैयारी करो लोगों की जान बचाने की और उत्तराखंड को खोदना छोड़ो।

Tirth Chetna

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *