कहीं शिगूफा तो साबित नहीं होगा स्कूलों का विलय

कहीं  शिगूफा तो साबित नहीं होगा स्कूलों का विलय
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देहरादून। कम छात्र संख्या वाले राजकीय प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों का विलय कर एक संसाधनयुक्त स्कूल का फारमेशन कहीं शिगूफा साबित तो नहीं होगा। विलय से संबंधित पूर्व में हुई तमाम एक्सरसाइज का अनुभव तो यही बताता है।

राज्य का स्कूली शिक्षा विभाग में लंबे समय से इस प्रकार की एक्सरसाइज चल रही है। ये अच्छी बात है। मगर, धरातल पर अभी तक कागजी वर्क के अलावा कुछ नहीं दिखा। हैरानगी की बात ये है कि विभाग एक ही भवन में संचालित जूनियर हाई स्कूल और हाईस्कूलों को एक नहीं कर सका। ये व्यवस्था विभाग का मुंह चिढ़ा रही है।

बहरहाल, अब विभाग तीन-पांच किमी. के दायरे में 10 से कम छात्र संख्या वाले सभी स्कूलों का एक स्कूल में विलय करने की तैयारी कर रहा है। दावे हो रहे हैं कि विलय के बाद जो स्कूल अस्तित्व में रहेगा उसे संसाधनों से लेस किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि राज्य में ऐसे स्कूलों की संख्या तीन हजार से अधिक है। 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की संख्या हर वर्ष तेजी से बढ़ भी रही है। ऐसी स्थिति इंटर कालेजों में भी दिखने लगी है।

Tirth Chetna

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