विश्व हिंदी दिवसः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के बढ़ते कदम

विश्व हिंदी दिवसः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के बढ़ते कदम
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डा. ममता थपलियाल।
आज विश्व हिंदी दिवस है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। विभिन्न स्तर पर हो रहे प्रयास से ये संभव हो रहा है। सतत प्रयास का असर आगे और बेहतर रूप में दिखेगा।

हिंदी को विश्व स्तर पर स्थापित करने में विश्व हिंदी सम्मेलनों की अहम भूमिका रही है। प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ था। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार और इसे मान्यता देने के उद्देश्य से ऐसा किया गया था। विश्व के विभिन्न देशों में स्थित भारत के दूतावास, सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं हिंदी के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। जिसमें अप्रवासी भारतीय भी प्रमुख स्थान रखते हैं।

विश्व स्तर पर लोग हिन्दी के बारे में जानने और समझने में खासी रूचि दिखा रहे हैं। हाल ही में सयुंक्त राष्ट्र संघ ने हिंदी की वेबसाइट एवं हिंदी में रेडियो प्रसारण शुरू किया। अमेरिका के करीब तीन दर्जन से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी न केवल पढ़ाई जा रही है बल्कि इस पर शोध हो रहे हैं।

विश्व स्तर पर बात करें तो डेढ़ सौ से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद जैसे अनेक देश हिंदी से भावनात्मक लगाव रखते हैं । वैश्विक बाजार आज हिंदी का सहारा लेकर फलीभूत हो रहा है।

गूगल, अमेज़न,फेसबुक, जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हिंदी के महत्व को स्वीकार रही हैं। यही कारण है कि अनेक विकसित राष्ट्र अपना बाजार विस्तारित करने के लिए हिंदी-प्रशिक्षण का सहारा ले रहे हैं। विश्व की बहुत कम भाषाएं ऐसी हैं जो जैसी बोली जाती हैं वैसे ही लिखी जाती हैं, हिंदी के वर्णक्रम की इस वैज्ञानिकता के रहस्य को दुनिया के भाषाविद जानना चाह रहे हैं।

इसकी व्यापकता और भाव हर किसी को आकर्षित कर रहा है। हिंदी का ढाई लाख से अधिक शब्दों का संसार है। ऑक्सफोर्ड शब्दकोष में हिन्दी भाषा के शब्दों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यानि विश्व स्तर पर हिंदी के उक्त शब्दों का व्यापक प्रयोग होने लगा है।

यूनिकोड और हिंदी कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में विकास होना हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता है। विश्व स्तर पर अनेक हिंदी भाषी लोग विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं, वेबसाइट, ब्लॉग, पुस्तकीय अनुवाद के माध्यम से हिंदी का विकास कर रहे हैं, इसमें अप्रवासी साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री के अभिभाषण से भी हिंदी को बल मिला है। हिंदी का नमस्ते अभिवादन समग्र विश्व में मशहूर है, कोरोना महामारी में नमस्ते ने सामाजिक दूरी बनाने में औषधि का कार्य किया। हिंदी का प्रयोग निरन्तर बढ़ रहा है।

यूनेस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार मातृभाषा-भाषियों की दृष्टि से विश्व में हिंदी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है। इन सब उपलब्धियों के बावजूद राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण हिंदी आज भी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा नहीं बन पाई।

आजादी के 75 साल पूर्ण होने पर भी हिंदी अपने ही देश में उच्च एवं उच्चतम न्यायालय की भाषा नहीं बनी। हिंदी में अच्छे अनुवाद की कमी है, माध्यम भाषा में निरन्तर अंग्रेजीकरण जैसे अनेक मुद्दे हिंदी को चिंतन से चिंता का विषय बना देते हैं।

भूमण्डलीकरण के इस दौर में तकनीकी दुनिया का महत्वपूर्ण स्थान है। कम्प्यूटर, लेपटॉप, स्मार्ट फोन आदि नवेले संचार माध्यमों में हिंदी का तेजी से प्रयोग हो रहा है। गूगल में इनपुट सेवा और बोलकर टाइप करने की सेवा में लिखने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।

किंतु प्रिंट माध्यमों में हिंदी फॉन्ट का मानकीकरण न होने के कारण आज भी अराजकता बनी हुई है। विंडोज और लिंक्स प्लेटफॉर्म पर हिंदी का न तो मानक की बोर्ड सेट है और न ही अक्षरों का कुंजीपटल पर स्थान । जिस प्रकार अंग्रेजी में ’टाइम्स न्यू रोमन’ और एरियल मानक फॉन्ट हैं वैसे ही हिंदी के लिए भी सम्पूर्ण विश्व हेतु मानक फॉन्ट तथा यूनिकोड निर्धारित करना चाहिए।

तकनीकी दुनिया का मानकीकरण निसन्देह हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने में सहायक होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की गति को प्रगति मिले इसके लिए निरंतर प्रयास जारी रखना आवश्यक है।

लेखिका उच्च शिक्षा में हिंदी की प्राध्यापक हैं।

Tirth Chetna

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