सरकार! बगैर मुखिया के चल कैसे रहे हैं स्कूल

सरकार! बगैर मुखिया के चल कैसे रहे हैं स्कूल

- in चमोली
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गैरसैंण। राज्य के डेढ़ हजार से अधिक सरकारी इंटर कालेज/हाई स्कूलों में प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के पद रिक्त हैं। ये कुल स्कूलों के 75 प्रतिशत से अधिक है।

जी हां, राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने विधानसभा में जानकारी दी कि राज्य के 1007 इंटर कालेजों में प्रिंसिपल और 570 हाई स्कूलां में हेडमास्टर के पद रिक्त हैं। ये कुल स्कूलों का 75 प्रतिशत से अधिक है।

कहा जा सकता है कि राज्य के सरकारी स्कूल बगैर मुखिया के चल रहे हैं। बावजूद इसके सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां गिना देती है। बहरहाल, सत्ताधीशों पर भले ही इसका कोई असर न पड़ रहा हो। मगर, सच ये है कि इससे स्कूलों की तमाम व्यवस्थाएं चौपट हो रही हैं।

दरअसल, सरकार ने शिक्षक से प्रिंसिपल बनने की प्रक्रिया को जटिल कर दिया है। रही सही कसर शिक्षा विभाग के अधिकारी और शासन में बैठे अधिकारी पूरी कर देते हैं। हालत ये है कि 20-22 साल की सेवा के बाद शिक्षकों को तदर्थ प्रमोशन से दिया जाता है।

बेवजह शिक्षकों के प्रमोशन लटकाने से शिक्षक हेडमास्टर से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। अधिकारी तर्क देते हैं कि अधिकांश हेडमास्टर प्रिंसिपल बनने की आर्हता पूरी नहीं करते किसे प्रिंसिपल बनाएं। जब 55 साल के बाद एलटी/प्रवक्ता हाई स्कूल का हेडमास्टर बनेगा तो प्रिंसिपल बनने के लिए जरूरी पांच साल की सेवा कहां से हो जाएगी।

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