जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ सरकार से खफा, चार नवंबर से आंदोलन
आरटीई एक्ट से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग
तीर्थ चेतना न्यूज
देहरादून। सरकार और विभागीय स्तर से कई बार मिले आश्वासन के बावजूद शिक्षकों की मांगों का निस्तारण न होने से खफा प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ ने स्थगित आंदोलन को एक बार फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। चार नवंबर से इसकी शुरूआत होगी।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा एवं महामंत्री जग़वीर खरोला द्वारा संयुक्त बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई। बताया कि मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों से कई बार शिक्षकों के विभिन्न मांगों पर वार्ता हो चुकी है। आश्वासन भी खूब मिले। मगर, निराकरण अभी तक नहीं हुआ।
टी. ई. टी. 17140 वेतन विसंगति , त्रिस्तरीय कैडर, जू. हा. प्रधानाध्यापको की अगली पदोन्नति सहित 13 सूत्रीय मांग पत्र के किसी भी प्रकरण का आज तक निस्तारण नहीं किया गया शिक्षक पात्रता परीक्षा (टी ई टी )पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव आर के सुधांशु जी द्वारा विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा सहित संगठन के 13 सूत्रीय मांगों के निराकरण करने के आदेश 15 सितंबर 2026 को निर्गत करने के बाद भी आज तक शासन द्वारा विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए कोई भी पहल नहीं की गई है और न ही निदेशालय द्वारा विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा कराये जाने का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया है और न ही कोई मांगो पर सकारात्मक निर्णय लिया है।
संगठन द्वारा लगातार अनुरोध करने के बाद निदेशालय द्वारा शिक्षकों के महत्वपूर्ण प्रस्तावों को शासन को प्रेषित नहीं किया जा रहे हैं भारत देश के अधिकांश राज्य उत्तर प्रदेश पंजाब,हरियाणा,हिमाचल,आंध्र प्रदेश सहित अनेक राज्यों ने शिक्षकों के लिए विशेष टी.ई. टी परीक्षा आयोजित कर टी ई टी जैसे महत्वपूर्ण विषय का समाधान करने का स्वागत योग्य कदम उठाया है लेकिन उत्तराखंड राज्य अभी तक इस पर कोई पहल नहीं कर पाया है।
टी. ई.टी पर सरकार व शासन के निर्णय न लेने से उत्तराखंड के जूनियर हाई स्कूलो में न तो पदोन्नति हो रही है और गत वर्ष शिक्षकों की भारी मात्रा में सेवानिवृत्ति होने से अधिकांश जूनियर हाईस्कूल एकल और शिक्षक विहीन हो चुके हैं। जिससे जिससे छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन पर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है संगठन के प्रदेश महामंत्री जगवीर खरोला ने अवगत कराया ।
वेतनमान 17 140 वेतन विसंगति जो 20 वर्षों से चली आ रही है अभी तक निराकरण न होना शिक्षकों के साथ अन्याय है शिक्षकों से सेवानिवृत्ति की समय शिक्षकों से 10 से 12 लाख रूपये की रिकवरी हो रही है जिससे शिक्षक वर्षाे की विभाग में नौकरी करने के बाद सेवानिवृति पर सरकार द्वारा किये जा रहे शोषण से परेशान और हताश है सरकार को सरकार व शासन को सभी शिक्षकों के हित में फैसला लेने की प्रबल मांग की है।
प्रदेश संयुक्त मन्त्री सुरेश भट ने पुरे सेवा काल में शिक्षकों को उत्तर प्रदेश व अन्य राज्योंबकी तरह एक बार अपने गृह जनपद में अंतर्जनपदीय स्थानांतरण करने का अवसर प्रदान करने की पुरजोर वाकलत की है
प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा ने आंदोलन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा संगठन के महत्वपूर्ण मांगो पर कोई कार्यवाही न होने से शासन विभाग व सरकार द्वारा कोरे आश्वासन से झूब्ध होकर व विवश होकर संगठन द्वारा अपनी 13 सूत्रीय मांगो के निराकरण हेतु स्थगित आंदोलन को दो चरणों में शुरू करने का निर्णय लिया है।
चार नवंबर से इसकी शुरूआत होगी। चार नवंबर को संगठन के समस्त ब्लॉक, जनपद व प्रदेश (निर्वाचित एवं मनोनीत ) पदाधिकारी एवं मुख्यालय के नजदीकी जनपदो के समस्त शिक्षक /शिक्षिकाये निदेशालय में अवकाश क लेकर धरना प्रदर्शन करेंगे और टेट अनिवार्यता पर छूट प्रदान करने माननीय प्रधानमंत्री जी एवं माननीय शिक्षा मन्त्री जी भारत सरकार को संसद में अध्यादेश लाने व माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय शिक्षा मंत्री जी उत्तराखंड सरकार को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने सहित 13 सूत्रीय मांग पत्र के निराकरण हेतु ज्ञापन प्रेषित करेंगे।
30 नवम्बर 2026 को उत्तराखंड राज्य के समस्त शिक्षक /शिक्षिकाये सामूहिक अवकाश लेकर परेड ग्राउंड से लेकर आक्रोश रैली के माध्यम से मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे।


