कुलपतियों के प्रयास और विश्वविद्यालय की कछुआ चाल

कुलपतियों के प्रयास और विश्वविद्यालय की कछुआ चाल
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हाल-ए- श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय

तीर्थ चेतना न्यूज

ऋषिकेश। श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपतियों के दावे रहे हैं कि उन्होंने खूब और खास प्रयास किए। बावजूद इसके विश्वविद्यालय है किसी भी मोर्चे पर आगे नहीं बढ़ सका। विश्वविद्यालय की ये कछुआ चाल हर किसी की चिंता बढ़ा रही है।

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की स्थापना से अब तक एक के बाद एक तीन कुलपति अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। एक व्यक्ति को दो बार कुलपति की कुर्सी मिली। कुल तीन कुलपति अभी तक विश्वविद्यालय देख चुका है। प्रत्येक ने दावा किया उसने विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए खूब और खास प्रयास किए। विश्वविद्यालय छोड़ने से पहले प्रयासों की सूची भी जारी की गई।

कुलपतियों के इन दावों को सच भी मान लेना चाहिए। वजह सरकार भी तीन साल तक यही मानती रही है। कभी कोई टोका टाकी नहीं हुई। चिटठी पत्री पर मिली क्लीन चिट को भी पोस्टर बनाकर प्रस्तुत किया गया।

हां, इससे बड़ा सच ये है कि श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय किसी भी मोर्चे पर आगे नहीं बढ़ा। बढ़ता हुआ दिख भी नहीं रहा है। अब ये विश्वविद्यालय की आगे बढ़ने की कछुआ चाल के लिए कौन जिम्मेदार है ये तो नए कुलपति ही बता सकेंगे।

नए कुलपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि कैसे विश्वविद्यालय का एक धेला खर्च किए बगैर किसी बड़े आयोजन को अंजाम दिया जाए। हां, पब्लिक डोमेन में बहुत सी बातें हैं। ऋषिकेश परिसर में तो कई मुददों को लेकर अब चर्चा जितने मुंह उतने तरीके से होने लगी है।

प्राध्यापक विश्वविद्यालय छोड़कर जा रहे हैं। ऋषिकेश कैंपस का बुरा हाल है। छात्र/छात्राएं स्वयं को ठगा सा महसूस करने लगे हैं।
ऑटोनोमस कॉलेज के रसूख को देख चुके छात्र/छात्राएं और उनके अभिभावक अब इसको लेकर मुखर भी होने लगे हैं। तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर को लेकर जो सब्जबाग दिखाए गए थे वैसा दूर-दूर तक नहीं है।

Tirth Chetna

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