भाजपा के यशस्वी नेताओं और देवतुल्य कार्यकर्ताओं पर संकट

भाजपा के यशस्वी नेताओं और देवतुल्य कार्यकर्ताओं पर संकट

- in राजनीति
0

ऋषिकेश। भाजपा के राज्य स्तरीय यशस्वी नेताओं और देवतुल्य कार्यकर्ताओं पर संकट मंडरा रहा है। संकट आगे बढ़ने के मौकों के कम होने का है। संकट का पहल चरण शुरू हो चुका है और अगले 10 सालों में ये विचारों पर भी दिखेगा।

भाजपा का फोकस अब सिर्फ चुनाव जीतने पर रह गया है। चुनाव जीतने के लिए भाजपा दूसरे राजनीतिक दलों के हर उस नेता को पार्टी में लाने का प्रयास कर रही है जो जनता के बीच लोकप्रिय हो या चुनाव जीत सकता हो।

उत्तराखंड में भी पार्टी ऐसा ही कुछ करने जा रही है। इसका पार्टी को तत्काल लाभ होना भी तय है। लाभ हुआ भी है। मगर, इसके साइट इफेक्ट का पहला चरण भी शुरू हो गया है। ये बात अलग है बड़ी पार्टी बनने के फेर में भाजपा इन साइड इफेक्ट को नजरांदाज कर रही है।

आने वाले 10 सालों के भीतर इसका असर विचारों तक भी पहुंचेगा। बहरहाल, पार्टी का कुनबा बढ़ाने के फेर में राज्य स्तरीय यशस्वी नेताओं और देवतुल्य कार्यकर्ताओं पर भी संकट मंडरा रहा है। संकट आगे बढ़ने के मौकों के कम होने कहा है। 2016 में कांग्रेस में बड़ी टूट के बाद 2018 के नगर निकाय और 2019 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में काफी कुछ देखा गया।

दरअसल, भाजपा में शामिल होने वाले दूसरे दलों के नेता अपने साथ अपने अग्गू-भग्गुवों को भी लाते हैं। ये अग्गू-भग्गू देवतुल्य कार्यकर्ताओं के लिए आगे बढ़ने की कंपेटिशन टफ कर देते हैं। कई मौकों पर देवतुल्य कार्यकर्ताओं को इससे उकताते हुए भी देखा गया।

अब देवतुल्य कार्यकर्ता ही नहीं राज्य स्तरीय यशस्वी नेताओं पर भी इसका असर दिखने लगा है। ये बात अलग है कि पार्टी के जिन नेताओं का सांसद/विधायकी का टिकट तय, मंत्री बनना तय, पार्टी सत्ता में नहीं हुई तो संगठन में बड़ा पद मिलना तय वाले नेता ऐसा नहीं मानते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

शिक्षकों के तबादला प्रकरणों के निस्तारण को बनेगा प्रकोष्ठ

देहरादून। शिक्षकों के तबादले से संबंधित प्रकरणों के