TET को लेकर टेंशन में राज्यों के शिक्षा विभाग
तीर्थ चेतना न्यूज
देहरादून। शिक्षक पात्रता परीक्षा, टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों से अधिक टेंशन राज्यों के स्कूली शिक्षा विभाग फेस कर रहे हैं। इसमें इतनी पेचदगियां हैं कि मामले के फिर से कोर्ट जाना लगभग तय है।
सुुप्रीम कोर्ट का निर्णय 2010 में लागू किए गए आरटीई एक्ट और 2017 में हुए संशोधन के आलोक में है। इसमें कहा गया कि आरटीई एक्ट से पूर्व की आर्हता के आधार पर कक्षा एक आठवीं तक की कक्षाओं को पढ़ाने के लिए सेवा में आए शिक्षकों को भी टीईटी पास करना होगा।
ये मामला इतना सीधा नहीं है। इस पर तमाम सवाल हैं। इन सवालों के राज्यों के स्कूली शिक्षा विभाग के पास नहीं हैं। सवालों के जवाब तलाशने के बजाए राज्य शिक्षकों को फरमान जारी कर रहे हैं कि टीईटी पास करो। परीक्षा के लिए एनओसी लो आदि; आदि।
सवाल है कि बेसिक/जूनियर से 30 प्रतिशत कोटे में एलटी में आ चुके शिक्षकों को टीईटी-1 पास करना होगा या टीईटी-दो। कई साल एलटी में सेवा देकर विषयगत लाभ पाकर प्रवक्ता बने शिक्षकों को भी टीईटी पास करना होगा। एलटी वाला मामला बेहद पेचदगी भरा हो गया है।
यही नहीं स्कूलों की व्यवस्था में प्रवक्ता भी कक्षा एक आठवीं तक की कक्षाएं ले रहे हैं क्या उन पर भी टीईटी लागू होगा। हालांकि आरटीई एक्ट में कक्षा एक से आठवीं तक का ही जिक्र है। बेसिक से एलटी में आए शिक्षकों और एलटी से प्रवक्ता बने शिक्षकों के मामले में पेचदगियां पैदा हो गई हैं।
ऐसे में उक्त मामला फिर से कोर्ट पहुंच जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इसके तमाम संकेत भी मिलने लगे हैं। हालांकि हाल के दिनों में इस प्रकारण को लेकर पॉलिटिकल क्लास भी सक्रिय हुए है। ऐसे में संसद से कोई निराकरण की संभावनाएं भी बलवती हुई हैं।
