धर्मेंद्र प्रधान पर लगा शिक्षकों को श्राप
तीर्थ चेतना न्यूज
देहरादून। भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंंद्र प्रधान पर शिक्षकांे का श्राप लग गया। टीईटी प्रकरण पर बतौर शिक्षा मंत्री उनके रवैए से देश भर के शिक्षकों में खासी नाराजगी है।
उल्लेखनीय है कि देश के स्कूली शिक्षकों पर एक अजीबोगरीब निर्णय थोपा गया है। आरटीई एक्ट के लागू होने से पहले सेवा में आए शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिर्वाय किया गया है। इससे देश के करीब 25 लाख शिक्षक परेशान हैं। केंद्र सरकार ने उनकी बात को एक तरह से अनसुना कर दिया है। अधिकांश राज्य सरकारों का भी यही हाल है।
शिक्षकों को उम्मीद थी कि मानसून सत्र में केंद्र सरकार कुछ समाधान करेगी। मगर, सरकार का जो लिखित बयान आया उससे देश के शिक्षक हैरान हैं। खास बात ये है कि टीईटी को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिया था कि वो इस मामले में शिक्षकों के लिए कुछ करेंगे। मगर, ऐसा नहीं हुआ।
इस तरह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के रवैए से देश भर के शिक्षकों में नाराजगी रही। शनिवार को छात्र/युवाओं के आंदोलन के चलते हुए उनके इस्तीफे को शिक्षकों का श्राप माना जा रहा है। सोशल मीडिया में तमाम ऐसी टिप्पणियां देखने और सुनने को मिल रही हैं।
शिक्षकों का टीईटी का मामला अभी भी ज्यों का त्यों है। राज्य सरकारों का इस पर रवैया केंद्र सरकार के जैसा है। खास बात ये है कि पिछले दो दशक में विभिन्न सरकारी विभागों के विभिन्न पदों के लिए आर्हता बदली हैं। मगर, किसी भी मामले में पूर्व में भर्ती कर्मियों को वर्तमान आर्हता पूरी करने को नहीं कहा गया है। इसमें अखिल भारतीय स्तर की सेवाएं भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्कूली शिक्षकांे के लिए ऐसा क्यों किया जा रहा है। शिक्षकों की हाय तो लगेगी है।
