अबकी बार केंद्र की सरकार किंग मेकर की मुटठी में
तीर्थ चेतना न्यूज
देहरादून। 2014 और 2019 में केंद्र की सत्ता से किंग मेकर शब्द पूरी तरह से गायब हो गया था। राज्यों के छत्रपों की राजनीति मुरझाने लगी थी। नरेंद्र मोदी ही ही सब कुछ थे। मगर, अबकी बार किंग मेकर रिर्टन होते दिख रहा है।
2004 और 2009 की कांग्रेसनीत यूपीए-वन और यूपीए-टू सरकार में लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव और वाम दल किंग मेकर की भूमिका में रहे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कांग्रेस समेत किंग मेकर की भूमिका वाले नेताओं के दबाव में दिखे जाते थे।
2014 और 2019 में कोई किंग मेकर नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही सब कुछ थे। इसका देश को कितना लाभ हुआ इसकी समीक्षा की जा सकती है। मगर, 2024 में नरेंद्र मोदी भले ही प्रधानमंत्री बन जाएं। मगर, उनकी सरकार को हमेशा किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले राजनीतिक दलों और उनके नेताओं का दबाव दिखेगा।
किंग मेकर के तौर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम सामने आने लगा है। लंबे समय से सत्ता से बाहर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्य पूर्व मुख्समंत्री चंद्रबाबू नायडू का नाम भी सामने आ रहा है। दोनों चतुर राजनीतिज्ञ हैं और नफा नुकसान की राजनीतिक चालें कब चलने ही अच्छे से जानते और समझते हैं।
राजनीति के आगे पीछे को समय रहते जज भी कर लेते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो पिछले कुछ सालों में राजनीतिक चतुराई का प्रदर्शन कई बार किया। इस बार तो उनका बनाया इंडिया गठबंधन ने भाजपानीत एनडीए का कड़ी टक्कर देकर उनके लिए एक तरह से विकल्प दे दिया है। हालांकि जेडीयू स्पष्ट कर चुका है कि अबकी बार नीतीश एनडीए से कहीं नहीं जाने वाले।

