जल संकट की गंभीरता को समझने की जरूरत

जल संकट की गंभीरता को समझने की जरूरत

- in उत्तरकाशी
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चिन्यालीसौड़। जल संकट की गंभीरता को समझने की जरूरत है। ताकि इसके उपयोग और दीर्घ संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकें।

ये कहना है वैज्ञानिकों का। मौका था गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, चिन्यालीसौड़ में क्षेत्र में जल संकट विषय पर वेबीनार का। पदमश्री डा. अनिल प्रकाश जोशी वेबीनार में बतौर मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जल संकट की गंभीरता को समझने की जरूरत है। ताकि इसके उपयोग और दीर्घ संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकें।

उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. कुमकुम रौतेला ने सामयिक विषय पर वेबीनार आयोजन की सराहना की। अन्य वक्ताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों के विलुप्त होने पर चिंता व्यक्त की। इसकी वजह जानने और इन्हें फिर से रिचार्ज करने के प्रयास होने चाहिए। कुछ स्थानों पर हुए प्रयासों की जिक्र भी वैज्ञानिकों ने किया।

कॉलेज द्वारा जल संकट विषय पर वेबीनार आयोजित करने की सराहना की। कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. संगीता मिश्रा ने वेबीनार में जुड़े सभी वैज्ञानिकों का आभार प्रकट किया। इस मौके पर प्रो. जीएस रजवार, आशीष कुमार, डा. डीपी उनियाल, डा. मधु थपलियाल, डा. रजनी लस्याल, डा. बृजेश चौहान, डा. विक्रम सिंह डा. कृष्णा डबराल, डा. आलोक बिजल्वाण, डा. दिनेश चंद्र आदि मौजूद थे।

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2 Comments

  1. Burning issue in Himalayas.

  2. Eye opening session.

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