भविष्य के लिए जल प्रबंधन जरूरीः प्रो. अनीता रावत

भविष्य के लिए जल प्रबंधन जरूरीः प्रो. अनीता रावत

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देहरादून। जल के महत्व को समझना होगा। इसके लिए जरूरी है कि जल प्रबंधन के लिए आम जन को जागरूक किया जाए। ताकि भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकें।

ये कहना है उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र, यूसर्क की निदेशक प्रो. अनीता रावत का। प्रो. रावत जल शिक्षा व्याख्यानमाला श्रृंखला (वाटर एजुकेशन लेक्चर सीरीज)’ के अंतर्गत ‘जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास : भाग एक – भूजल (बेस्ट प्रैक्टिसेज इन वाटर रिसोर्स मैनेजमेंटः पार्ट वन – ग्राउंड वाटर)’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम के उदघाटन के मौके पर बोल रही थी।

उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यूसर्क द्वारा ’’उत्तराखंड में जल सुरक्षा एवं जलसंरक्षण केंद्रित पर्यावरणीय समाधान’’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसके अन्तर्गत विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों ने जल के महत्व को देखते हुये यह निष्कर्ष दिया कि यूसर्क द्वारा जल संरक्षण, प्रबंधन, गुणवत्ता विषयक कार्यक्रमों को मासिक श्रंखला के आधार पर आयोजित किया जाय जिसके क्रम में आज ‘‘वाटर एजुकेशन लेक्चर सीरीज’’ के अंतर्गत प्रथम ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

कहा कि पांच तत्वों में जल तत्व एक महत्वपूर्ण तत्व है जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं है। उन्होंने अपने संबोधन में उपस्थित प्रतिभागियों को बताया कि प्रभावकारी जल स्रोत प्रबंधन कार्य के लिए कम्युनिटी द्वारा पार्टिसिपेटरी एप्रोच के माध्यम से विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े जल स्रोतों का संवर्धन व संरक्षण परंपरागत तथा आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करके किया जा सकता है साथ ही साथ राज्य के विभिन्न भूभागों में जल से संबंधित समस्याओं के आधार पर उनके निदान की विशिष्ट तकनीकों का प्रयोग किया जा सकता है जिससे पर्वतीय जल स्रोतों का संवर्धन व संरक्षण उचित प्रकार से किया जा सकता है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूसर्क के वैज्ञानिक तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ भवतोष शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के जल स्रोतों के संवर्धन हेतु हम सभी को अपने आसपास के जल स्रोतों के संरक्षण व प्रबंधन हेतु सामाजिक सहभागिता के साथ कार्य करना होगा।

तकनीकी सत्र का प्रथम व्याख्यान केंद्रीय भूमि जल परिषद (सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड) उत्तरांचल क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ प्रशांत राय ने “वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट थ्रू रेन वाटर हार्वेस्टिंग“ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान देते हुए उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय भाग, मैदानी भाग तथा तराई भाग में भूजल की उपलब्धता, भूजल रिचार्ज के विभिन्न तरीके, भूविज्ञान, पृथ्वी के अंदर विभिन्न प्रकार की हार्ड एवम् सॉफ्ट चट्टानों की स्थिति व उनमें भूजल रिचार्ज की संभावनाएं आदि पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि नेशनल एक्वीफर मैपिंग प्रोजेक्ट के अंतर्गत उत्तराखंड राज्य के विभिन्न जिलों में अवस्थित एक्वीफर का अध्ययन सीजीडब्ल्यूबी के द्वारा किया जा रहा है जिसके आधार पर भूजल रिचार्ज की विभिन्न विधियों को आवश्यकता के अनुसार अपनाया जाएगा।

तकनीकी सत्र का द्वितीय व्याख्यान हिमोत्थान (टाटा ट्रस्ट) देहरादून के वैज्ञानिक डॉ सुनेश शर्मा ने “वाटर सिक्युरिटी थ्रू स्प्रिंगशेड मैनेजमेंट इन हिमालयन रीजन“ विषय पर देते हुए विभिन्न प्रकार के एक्वीफर्स, स्प्रिंग्स के सूखने के कारण व समाधान, स्प्रिंग्स के डिस्चार्ज डाटा, उत्तराखंड राज्य में अलग अलग मौसम में होने वाली वर्षा में भिन्नता के आंकड़े व प्रभाव, वाटर गवर्नेंस, धारा जन्म पत्री व जल कार्ड के द्वारा जल स्रोतों के प्रवाह में अलग अलग समय में होने वाले परिवर्तनों के डाटा एकत्रीकरण आदि पर विस्तार से बताया। डॉ सुनेश ने कहा कि सामुदायिक प्रयासों से ही जलस्रोतों का प्रबंधन व पुनर्जीवन सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

द्वितीय तकनीकी सत्र में कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन यूसर्क के वैज्ञानिक डॉ ओम् प्रकाश नौटियाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में यूसर्क के वैज्ञानिक डॉ मंजू सुंदरियाल, डॉ राजेंद्र सिंह राणा, आईसीटी टीम के उमेश चन्द्र, ओम् जोशी, राजदीप जंग, शिवानी पोखरियाल सहित डॉ दीपक खोलिया, डॉ अवनीश चौहान, नमामि गंगे के श्री रोहित ज्यारा सहित विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

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