कोरोनाः आ तुझे ले चलें आभासी दुनिया में

कोरोनाः आ तुझे ले चलें आभासी दुनिया में

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देहरादून। कोरोना ने राजनीतिज्ञों जनसरोकार बदल दिए हैं। अब सरोकार आभासी होने लगे हैं। ये आभासीपन नेताओं को खूब भा रहा है। राजनेता भी गुनगुनाने लगे हैं कि आ तुझे ले चलें अभासी दुनिया में। ताकि अभास रहे कि 2022 और 2024 में वोट देना है।

वैश्विक महामारी कोरोना से दुनिया जहां प्रभावित है। आर्थिक, प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्थाएं तमाम तरह से प्रभावित हुई हैं। हर व्यवस्था नए सिरे से रिस्टोर हो रही है। इसमें राजनीति भी शामिल है।

राजनीति में सरोकार आभासी होने लगे हैं। जनता तक पहुंचने के लिए आभासी तरीके अपनाए जाने लगे हैं। नेताओं को ये तरीका खूब भा रहा है। इसमें न डांडी कांठी चढ़ना पढ़ रहा है और न ही पसीना बहाना पड़ रहा है। लोगों की नाराजगी भी दूर-दूर तक नहीं दिखती। साथ ही सवाल करने वाली आंखों से बचने का मौका भी मिल गया है।

प्रचार के इस आभासी तरीकों में अपनी हां में हां मिलाने वाले ही होते हैं। आभासी तरीके में राजनेता सिर्फ अपनी और अपनी पार्टी की बात कर रहे हैं। लोगों को अधिक से अधिक आभासी दुनिया में ले जाने के प्रयास हो रहे हैं। ताकि सिर्फ बोला जा सकें और सवाल सिर्फ आभासी हों।

नेता इसमें सफल हो रहे हैं। दरअसल, आभासी तरीके से राजनीतिक दल सिर्फ लोगों को याद दिला रहे हैं कि 2022 में विधानसभा और 2024 में उन्हें वोट करना है। इन दो चुनावों के बीच छोटी सरकारें भी चुननी हैं। वोट हकीकत में करना है। उस वक्त आभासी दुनिया से बाहर निकलना है।

तकनीकी का ये उपयोग भले ही अभी नेताओं को खूब भा रहा हो। मगर, जनसरोकारों को कनेक्ट करने का ये तरीका सिर्फ राजनीति हो सकता है। जनसेवा में तो जनता के पास जाना ही होगा। जनता के दुख दर्दों को महसूस करना होगा।

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