विधायक निधि नहीं होती तो लोग भूल जाते इन माननीयों को

विधायक निधि नहीं होती तो लोग भूल जाते इन माननीयों को

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देहरादून। विधायक निधि कुछ जनप्रतिनिधियों के लिए ऑक्सीजन का काम कर रही है। विधायक निधि ही मामनीयों को विधायक होना महसूस करवा रही है। यदि विधायक निधि नहीं होती तो लोग कई माननीयों को भूल ही जाते।

विधायक निधि और सांसद निधि ने जनप्रतिनिधियों को जनता से दूर और निधि पोषित समर्थकों के और करीब ला दिया है। परिणाम जनप्रतिनिधि जनता के सवाल, क्षेत्र की असली समस्या, समाज के मुददों से दूर हो गए हैं।

जनप्रतिनिधियों का अधिकांश समय विधायक निधि की बांट लगाने, इसके माध्यम से क्षेत्र की राजनीति साधने, रूठे समर्थकों को मनाने, क्षेत्र के दौरे के समय भीड़ जुटाने के लिए प्रपंच जोड़ने में जाया हो रहा है। विधायिका से संबंधित मुददों पर तो बहुत कम विधायक मुंह खोल पाते हैं।

अब तो स्थिति ये है कि विधायक, सांसदों को जिला पंचायत अध्यक्ष, सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और बीडीसी से तगड़ी चुनौती मिल रही है। वजह विधायक निधि, सांसद निधि से भी वो ही काम हो रहे हैं जों जिला प्लान ब्लॉकों से होते हैं।

कुल मिलाकर विधायक निधि नहीं होती तो कई माननीयों को तो क्षेत्र के लोग चुनाव जीतने के दो-तीन माह के भीतर ही भूल जाते।

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