आखिर कौन चलाएगा और कैसे चलेगा स्कूली शिक्षा विभाग

आखिर कौन चलाएगा और कैसे चलेगा स्कूली शिक्षा विभाग

जून 2027 तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे अधिकांश अधिकारी


तीर्थ चेतना न्यूज

देहरादून। स्कूली शिक्षा विभाग को जून 2027 के बाद कौन चलाएगा। और कैसे चलेगा स्कूली शिक्षा विभाग विभाग के अधिकांश आलाधिकारी राजकीय सेवा से निवृत्त होने के वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं।

भारतीय जनता पार्टी बहुत दूर की सोचती है। दूर दृष्टि नेक इरादे की बात भी होती है। पार्टी को इसका खूब लाभ मिलता है। मगर, पार्टी की सरकारों में ऐसा नहीं दिखता है। कम से कम उत्तराखंड राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग के संबंध में ऐसा दावे के साथ कहा जा सकता है।

राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग में अब अधिकारियों का टोटा होने वाला है। 25 में से 16 साल राज्य में सरकार चलाने वाली भाजपा ने इस पर गौर नहीं किया। परिणाम सबके सामने है। कांग्रेस सरकार का भी यही हाल रहा।

राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग में तैनात संयुक्त निदेशक, अपर निदेशक और निदेशक स्तर के अधिकांश अधिकारी जून 2027-28 तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था कई तरह से प्रभावित होना तय है। यही हाल जिलों का भी है।

जिलों के लिए प्रमोशन से अधिकारियों की व्यवस्था हो जाएगी। मंडल और निदेशालय के लिए अधिकारी जुटना मुश्किल होगा। अधिकारियों का ये अभाव अब लगभग दो दशक तक बना रहेगा। कारण पीईएस अधिकारी मंडलीय और निदेशक स्तर की आर्हता सेवा में आने के 15-20 साल के बाद ही प्राप्त कर पाते हैं।

स्कूलों के प्रिंसिपल पद का भी यही हाल है। शिक्षकों के प्रमोशन बंद पड़े हैं। शिक्षकों की स्थिति शिक्षा विभाग में अजीबोगरीब हो गई। विभाग में शिक्षक बहुसंख्य जरूर हैं मगर, उनकी बात कहीं नहीं है। सरकार का गुरू वाक्य बना हुआ है कि मामला कोर्ट में है।

इस तरह से स्कूलों में प्रिंसिपल और कार्यालयों में अधिकारी के बगैर स्कूली शिक्षा विभाग कैसे चलेगा समझा जा सकता है। हैरान करने वाली बात है कि इस राज्य की राजनीति सुन्न पड़ी है। क्या पक्ष और क्या विपक्ष कोई इस पर मंुंह खोलने को तैयार नहीं है।

Tirth Chetna

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