इस बार नारों में आने वाली नहीं है उत्तराखंड की जनता

इस बार नारों में आने वाली नहीं है उत्तराखंड की जनता

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ऋषिकेश। 20 सालों से छली जा रही उत्तराखंड की जनता इस बार राजनीतिक दलों के नारों में आने वाली नहीं है। इस बार पार्टी से ज्यादा तवज्जो प्रत्याशी को मिलेगी।

उत्तराखंड का दो दलीय व्यवस्था का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। दो दलीय व्यवस्था ने यहां मित्र विपक्ष जैसा अविष्कार कर दिया। परिणाम जनता के हाथ निराशा लगी। नारों में आकर कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस को सत्ता सौंपने वाली जनता इस बार सजग दिख रही है।

राज्य के सूदूर क्षेत्र से लेकर बड़े शहरों तक में आम लोगों से बातचीत करने पर जो बात उभरकर सामने आ रही है उससे लगता है कि इस बार जनता पार्टी से अधिक तवज्जो प्रत्याशी को देंगे। वो अपने लिए अच्छा विधायक चुनेंगे। किसी के कहने या किसी नारे में आकर किसी को भी यूंह ही विधायक नहीं बनाएंगे।

2017 में डबल इंजन और मोदी की अपील पर भाजपा को भूत न भविष्यति वाला जनादेश का अनुभव भी लोगों को ठीक नहीं रहा। भाजपा साढ़े चार साल में प्रचंड बहुमत जैसा कोई बड़ा काम राज्य के लिए नहीं कर सकी है। ये बात अब भाजपा के कटटर समर्थक भी करने लगे हैं।

साढ़े चार साल में तीन मुख्यमंत्री। जीरो टॉलरेंस के लबादे के पीछे जो कुछ हुआ लोग अच्छे से समझ चुके हैं। अब चुनाव से पहले विकास की बात हो रही है। रोजगार देने के दावे हो रहे हैं। साढ़े चार साल का हिसाब देने में भाजपा सरकार कतरा रही है।

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