सरकार! तीर्थाटन की ऐसी उपेक्षा क्यों ?

सरकार! तीर्थाटन की ऐसी उपेक्षा क्यों ?

देहरादून। प्रदेश की तीरथ सिंह रावत सरकार ने कोरोना से ठप पर्यटन व्यावसाय के लिए राहत के मरहम की व्यवस्था कर दी। मगर, तीर्थाटन से जुड़े लोगों को राहत का मरहम देना सरकार भूल गई।

बुधवार कोई ही राज्य कैबिनेट की बैठक में 28 करोड़ 99 लाख रूपये पर्यटन व्यवसायियों को देने का ऐलान किया गया है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत लाभार्थियों को 2500 रूपये प्रतिमाह की दर से दो माह के लिये 5 हजार रूपये प्रति कार्मिक को एक मुश्त आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से दिया जायेगा।

इसकी धनराशि 2500 लाख होगी। 352 टूर ऑपरेटरों को 10हजार प्रति फर्म डीबीटी के माध्यम से दिया जायेगा। इसकी धनराशि 35.20 लाख होगी। पर्यटन व्यवसायियों के लिये पंजीकृत 303 एडवेंचर टूर ऑपरेटरों को 10 हजार रूपये प्रति फर्म डीबीटी के माध्यम से दिया जायेगा, इसकी धनराशि 30.30 लाख होगी।

पर्यटन व्यावसाय के लिए इतना कुछ करना अच्छी बात है। मगर, तीर्थाटन को इसमें शामिल न करना ठीक नहीं है। हजारों लोग हैं जिनकी रोजी-रोटी तीर्थाटन पर आधारित है। इससे जुड़े लोगों के पुरखों में सालों साल काम कर आज राज्य को तीर्थाटन के क्षेत्र में आगे बढ़ाया है।

राज्य के पर्यटन का आधार भी तीर्थाटन है। मुश्किल दिनों में सरकार का उनकी सुध न लेने पर तीखी प्रतिक्रिया भी आ रही हैं। इसमें तीर्थ पुरोहित से लेकर डंडी-कंडी, माला-कंठी, पूजा-अर्चना करने वाले तक शामिल हैं।

प्रदेश सरकार अक्सर पर्यटन से अधिक माला तीर्थाटन की जपती है। ऐसे में विकट स्थिति में तीर्थाटन से जुड़े लोगों को सरकार का भुलना हर किसी को हतप्रभ कर रहा है।

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