एक था ऑटोनोमस कॉलेजः मंचीय शोभा तक सीमित रहे पुरातन छात्र

एक था ऑटोनोमस कॉलेजः मंचीय शोभा तक सीमित रहे पुरातन छात्र

- in ऋषिकेश
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ऋषिकेश। ऑटोनोमस कॉलेज के साथ हुए खेल को छात्र समझ नहीं सकें और अक्सर छोटे-बड़े आयोजनों में मंच की शोभा बढ़ाने वाले पुरातन छात्रों ने जाने-अनजाने गौर नहीं किया।

सबको मिलेगा का भ्रम फैलाकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऋषिकेश और पूरे राज्य की बड़ी उपलब्धि ऑटोनोमस कॉलेज का अस्तित्व मिटाया गया। इसे मौजूदा छात्र समझ नहीं सकें और या कहें उनके मन में भ्रम को और गाढ़ा कर दिया गया। कुछ गुरूजनों ने भी चुपके से सिर पर हाथ फेर दिया। परिणाम छात्र निहाल हो उठे।

इससे ऑटोनोमस कॉलेज का अस्तित्व मिटाने का काम और आसान हो गया। कॉलेज की हर ऊंच नीच को परिसर के बाहर से सूंघ कर कॉलेज तक पहुंच जाने वाले घाघ राजनीतिज्ञ इस खेल को समझ नहीं सकें। या कहें राजनीति में मशगूल होकर पत्थर के सनम बन गए।

कॉलेज के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में मंच की शोभा बढ़ाने वाले पुरातन छात्रों का जाने-अनजाने चुप्पी साधे रखना हैरान करता है। हैरानगी इस बात की भी है कि एक साल में सारी स्थिति स्पष्ट होने के बाद भी कहीं से चूं तक न होना समाज के शिक्षा के प्रति बदलते रूख को भी दिखाता है।

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