एक था ऑटोनोमस कॉलेजः काश! आप कह देते ये हो नहीं सकता

एक था ऑटोनोमस कॉलेजः काश! आप कह देते ये हो नहीं सकता

- in ऋषिकेश
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ऋषिकेश। समाज के दर्पण कहे जाने शिक्षक/प्राध्यापक सरकारी कर्मचारी क्या बनें उनके बोलने की क्षमता, कौशल और साहस व्यवस्था की आचरण नियमावली ने दबाकर रख दिया।

राज्य को ऑटोनोमस कॉलेज विशुद्ध रूप से गवर्नमेंट पीजी कॉलेज के योग्य प्राध्यापकों की देन थी। उन्होंने रात दिन मेहनत कर राज्य को ये उपलब्धि दिलाई थी। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए प्राध्यापकों ने जो टीम वर्क दिखाया उसका आधा भी इसको बचाने के लिए कर देते तो आज ऑटोनोमस कॉलेज होता।

दरअसल, राज्य में शिक्षक/प्राध्यापक शिक्षा से जुड़े मुददों पर कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। सरकारी कर्मचारी का लबादा मिलने के बाद हर कोई कर्मचारी आचरण नियमावली से दबकर रह गया है। राज्य इसका खामियाजा कई तरह से भुगत रहा है।

बहरहाल, ऑटोनोमस को ऋषिकेश कॉलेज में धरातल पर उतारने के लिए छात्रों और समाज को तैयार करने वाले प्राध्यापक हैरान हैं। हर कोई मन से ऑटोनोमस कॉलेज को बचाना चाहता है। मगर, कुछ कर नहीं पा रहे हैं।

समाज प्राध्यापकों की पीड़ा को समझने को तैयार नहीं और व्यवस्था को लगता है कि सब कुछ ऑल इज वेल है। हालांकि उम्मीद है कि ऑटोनोमस कॉलेज को बचाने की कोई सूरत जरूर बनेगी। कोई जरूरत सामने आएगा।

बहरहाल, अचारण नियमावली की तरह आंख मूंदकर प्राध्यापकों ने काश कह भर दिया होता कि ये हो नहीं सकता तो संभव है कि ऑटोनोमस कॉलेज का अस्तित्व मिटाने वालां के कदम कुछ ठिठक जाते।

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