एक था ऑटोनोमस कॉलेजः बुद्विजीवियों की चुप्पी से मिला मनमानी का लाइसेंस

एक था ऑटोनोमस कॉलेजः बुद्विजीवियों की चुप्पी से मिला मनमानी का लाइसेंस

- in ऋषिकेश
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ऋषिकेश। ऋषिकेश स्थित राज्य के एक मात्र ऑटोनोमस कॉलेज का अस्तित्व समाप्त होने के पीछे राज्य के बुद्धिजीवियों की चुप्पी का भी बड़ा रोल है। कॉलेज को ऑटोनोमस का तमगा दिलाने वाले बुद्धिजीवियों ने चुपचाप इसका अस्तित्व मिटते हुए देखा।

उत्तराखंड में अब कोई ऑटोनोमस कॉलेज नहीं रहा। एक मात्र ऋषिकेश ऑटोनोमस कॉलेज को सरकार ने सात साल में भी आकार नहीं ले सके श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय का परिसर बना दिया। इसको अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत कर कुछ चेहरे फूले नहीं समा रहे। सच ये है कि ऋषिकेश से बड़ी उपलब्धि छीन ली गई है।

बहरहाल, ऑटोनोमस कॉलेज का अस्तित्व के समाप्त होने के पीछे बुद्धिजीवियों की चुप्पी का बड़ा रोल है। हैरानगी की बात ये है कि ऋषिकेश कॉलेज को नैक से ए ग्रेड और यूजीसी से ऑटोनोमी की वजह रहे बुद्धिजीवियों ने चुपचाप इसका अस्तित्व मिटते हुए देखा।

इसमें तमाम प्रोफेसर शामिल हैं। किसी ने इस पर मुंह नहीं खोला। राज्य में बुद्धिजीवियों की ऐसी चुप्पी अक्सर और हर मुददे पर दिखती। बुद्धिजीवियों की चुप्पी से अक्सर व्यवस्थाएं बेलगाम होती हैं। व्यवस्था को वो सब कुछ सही लगता है जो वो सोचते और करते हैं।

उत्तराखंड राज्य में ऐसा 20 सालों से दिख रहा है। बुद्धिजीवियों के स्तर पर भी कोई प्रेशर ग्रुप डेवलेप न होना और हैरान करता है। कम से कम उच्च शिक्षा/स्कूली शिक्षा पर तो मुंह खोलिए गुरूदेव।

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