उत्कृष्ठ कार्य करने वाले किसानों को उद्यान मंत्री ने किया सम्मानित

उत्कृष्ठ कार्य करने वाले किसानों को उद्यान मंत्री ने किया सम्मानित

- in देहरादून
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देहरादून औद्यानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य करते हुए अन्य किसानों को भी प्रेरित करने वाले 12 किसानों को उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने सम्मानित किया।

सोमवार को दीक्षा भवन में आयोजित किसान गोष्ठी का प्रदेश के कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने औद्यानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य कर रहे प्रगतिशील कृषकों कुन्दन सिंह पंवार, जयपाल सिंह चौहान, निर्मल तोमर , वेदपाल , सतेन्द्र सिंह ,सत्यप्रकाश नौटियाल ,देवेन्द्र सिंह चौहान , दिव्या, सुनील सिंह , श्रीमती पूनम सिंह, चतर दत्त जोशी , गणेश रावत को सम्मानित किया।

इस मौके पर प्रगतिशील कृषकों द्वारा अपने अनुभवों को मंत्री और विभागीय सचिव के सम्मुख रखा गया। राज्य में कृषि और उद्यान की बेहतरी के लिए उठाए जाने वाले कदमों को लेकर सुझाव भी प्रस्तुत किए।

इस मौके पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का उत्तर प्रदेश से पृथक होने का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकना था। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों एवं कृषि जलवायु को दृष्टिगत रखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को सरोकने में औद्यानिकी का विशेष योगदान है।

कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने हेतु उन्हें रेखीय गतिविधियों यथाः- मौनपालन , मशरूम , सगन्ध , औषधीय , पशुपालन , मत्स्य पालन, डेयरी इत्यादि से भी जोडने की आवश्यकता है। इस दिशा में राज्य में लगातार कार्य हो रहा है।

कृषि कानून पर प्रकाश डालते हुए अवगत गया कि कृषकों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से कृषि कानून में विभिन्न व्यवस्थाएं की गई। इसमें राज्य से बाहर उत्पाद की बिक्री किये जाने की व्यवस्था , मण्डी शुल्क समाप्त किये जाने की व्यवस्था एवं निजी क्षेत्र में मण्डियों की स्थापना के साथ – साथ कृषकों को अनेक सुविधायें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है तथा कृषि कानून में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिग किसानों हेतु स्वैच्छिक रखी गयी है।

मंत्री उनियाल ने अवगत कराया कि अरूणाचल प्रदेश में कीवी मिशन संचालन किया रहा है , जिसकी तर्ज उत्तराखण्ड में भी कीवी मिशन के क्रियान्वयन हेतु शीघ्र ही अरूणाचल प्रदेश के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य योजना तैयार की जायेगी। राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु जैविक एक्ट लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का प्रथम राज्य है।

जैविक एक्ट के माध्यम से किसानों के उत्पादों को जैविक प्रमाण पत्र प्रदान कराते हुए उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्रदान कराया जा रहा है। साथ ही सरकार द्वारा कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु “ उत्तराखण्ड फल पौधशाला अधिनियम “ में दण्ड का प्राविधान भी किया गया है ।

उन्होंने कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त अधिक उत्पादन वाली प्रजातियों के वितरण पर बल देते हुए किसानों की मांगानुसार प्रदेश के अन्तर्गत ही उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री का उत्पादन किये जाने के निर्देश दिये गये। साथ ही अवगत कराया गया कि सरकार द्वारा विभाग के अधीन 94 राजकीय उद्यानों को श्रेणीकृत किया गया है।

इस मौके पर उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशक हरमिन्दर सिंह बवेजा ने बताया कि में औद्यानिकी सम्भावनायें विद्यमान हैं , जिसको दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में विकास किये जाने की आवश्यकता है। कहा कि प्रदेश में औद्यानिकी के विकास हेतु राजकीय क्षेत्र के साथ – साथ व्यक्तिगत क्षेत्र में भी हर सम्भव प्रयास किये जायेगें तथा भविष्य में शीघ्र ही किसानों की मांगानुसार उच्च गुणवत्तायुक्त पौध रोपण सामग्री का उत्पादन राज्य के अन्तर्गत किया जायेगा ।

किसान गोष्ठी में सचिव कृषि हरबंस सिंह चुघ, निदेशक डा. हरमिन्दर सिंह बवेजा , निदेशक बागवानी मिशन डा. रतन कुमार , संयुक्त निदेशक , अमर सिंह , उप निदेशक , डा. सुरेश राम , उप निदेशक , महेन्द्रपाल , उप निदेशक , अन्य अधिकारीगणों के साथ – साथ प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे । इसके अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से समस्त मुख्य / जिला उद्यान अधिकारी व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे ।

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