वरिष्ठ भी थे और श्रेष्ठ भी फिर भी नहीं मिला विश्वविद्यालय की सेवा का मौका

वरिष्ठ भी थे और श्रेष्ठ भी फिर भी नहीं मिला विश्वविद्यालय की सेवा का मौका

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ऋषिकेश। गवर्नमेंट डिग्री/पीजी कॉलेज से श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में समायोजित होने से वंचित कुछ प्राध्यापक ने सवाल खड़े किए हैं। श्रेष्ठता के पैमाने के बारे में प्राध्यापक जानना चाह रहे हैं। इसको लेकर आरटीआई का सहारा लिया जा रहा है।

दरअसल, वरिष्ठ होने और बेहतर टीचिंग अनुभव, यूजीसी के मानकों में भी पूरी तरह से फिट होने के बावजूद कुछ प्राध्यापकों का विश्वविद्यालय में समायोजन नहीं हुआ। जबकि कुछ जूनियर प्राध्यापक विश्वविद्यालय की सेवा में समायोजित हो गए।

इसको लेकर खूब सवाल खड़े हो रहे हैं। मंगलवार को दिन भर प्राध्यापकों के बीच यही चर्चा का विषय रहा। कई समायोजन पर अंगुली भी खूब उठ रही हैं। कई चेहरों को लेकर खूब सवाल भी हैं।

बहरहाल, समायोजन के मानकों पर पर धड़ाधड़ आरटीआई लगने लगी हैं। समायोजन से रह गए प्राध्यापक जानना चाह रहे हैं कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। वरिष्ठता के बाद श्रेष्ठता का मापन किस आधार पर हुआ।

प्राध्यापक सवाल उठा रहे हैं कि उत्तम, अतिउत्तम जैसे शब्दों के फेर में कहीं वो पीछे तो नहीं रह गए। सवाल इसके अलावा भी कई उठ रहे हैं। बहरहाल, कुछ मामलों का कोर्ट तक जाना भी तय माना जा रहा है।

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