… अब स्कूलों की छुटटी पर प्रयोग

… अब स्कूलों की छुटटी पर प्रयोग

पढ़ाई के लिए अधिक दिन सुरक्षित करने की गरज


तीर्थ चेतना न्यूज

देहरादून। सरकार स्कूलों में एक और प्रयोग करने जा रही है। इस बार प्रयोग स्कूलों की गर्मी और सर्दियों की छुटटी पर है। प्रयोग की गरज पढ़ाई के लिए अधिक दिन सुरक्षित करने की बताई जा रही है।

पिछले तीन दशकों से स्कूली शिक्षा में एक के बाद एक प्रयोग हो रहे हैं। उत्तराखंड स्कूली शिक्षा में प्रयोग को लेकर खासा आगे रहा है। राज्य ने अपने स्कूल तक सीबीएसई को सौंप दिए। इस प्रयोग से पहले राज्य सरकार ने स्कूलों में पाठयक्रम को पूरी तरह से सीबीएसई के अनुरूप कर दिया था।

मॉडल स्कूल, पीएम श्री स्कूल भी प्रयोग हैं। इन प्रयोगों का क्या लाभ हुआ ये शिक्षा विभाग के अधिकारी जरूर जानते होंगे। बहरहाल, प्रयोग स्कूलों की छुटटी पर होने जा रहा है। एनईपी 2020 के आलोक में ये बदलाव किया जा रहा है।

इसका प्रस्ताव तैयार है। इसके मुताबिक अब गर्मियों और सर्दियों में छुटटी 16-16 दिन की होंगी। अभी तक ये करीब 48 दिन की होती हैं। 16 दिन की छुटटी पर कैंची चली और ये दिन पढ़ाई के दिनों में शामिल किए जाएंगे। कुल मिलाकर साल भर में पढाई के लिए 200 दिन रखे जाएंगे।

शेष रहे 165 दिन में 50 रविवार होंगे। 30 दिन परीक्षा/ मूल्यांकन आदि के होंगे। 10 दिन बैगलेस डे होंगे। 11 दिन कांवड़ यात्रा/ आपदा जैसी छुटिटयों के लिए आरक्षित रखे जाएंगे।

बहरहाल, 1992 तक स्कूलों में गर्मियों की छुटटी 20 मई से शुरू होती थी और आठ जुलाई को स्कूल खुलता था। अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में स्थित स्कूलों में सर्दियों की छुटटी होती थी।

यानि आज जो टाइम टेबल तय किया जा रहा है तब के टाइम टेबल में गर्मियों की छुटटी में बरसात भी निकल जाता था। मौजूदा स्थिति ये है कि स्कूलों में पढ़ाई छुटिटयों से प्रभावित नहीं होती। बल्कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य/ प्रशिक्षण और तमाम सरकारी कार्यक्रमों से पढ़ाई प्रभावित होती है।

Tirth Chetna

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