उत्तराखंड के स्कूलों में बिगड़ रही खेलों की सेहत

उत्तराखंड के स्कूलों में बिगड़ रही खेलों की सेहत

school-sportsउत्तराखंड के स्कूलों में खेलों की सेहत तेजी से बिगड़ रही है। वार्षिक खेल रश्म अदायगी बनते जा रहे हैं।

निःशुल्क शिक्षा ने समाज की नजरों में पहले सरकारी स्कूलों को दोयम दर्जे का बना दिया। अब इसका असर स्कूली खेलों पर भी दिखने लगा है। स्कूलों में खेल रश्म आदयगी भर रह गए हैं। दर्जनों विद्यालयों के संकुल स्तरीय खेल एक दिन में निपट रहे हैं। यही हाल ब्लॉक स्तर के खेलों का भी है।

ऐसे में जिले और स्टेट के क्या हाल होते होंगे बताने की जरूरत नहीं है। दरअसल, ब्लॉक तक की स्कूली खेल प्रतियोगिताएं पूरी तरह से शिक्षक अपनी जेब से करा रहे हैं। हालात इससे भी और बिगड़ रहे हैं कि सरकार ने खेल शिक्षकों को क्लास पढ़ाने में लगा दिया है।

प्राथमिक शिक्षा में योग्य खेल शिक्षकों की विभाग सुध ही नहीं ले रहा है। खेल शिक्षक यहां मैदान में छात्रों को खेल की एबीसीडी सीखाने बजाए स्कूल के दो दर्जन रजिस्टरों को मेंटेन करने के काम लगे हुए हैं।

स्कूली खेलों के प्रति सरकार की काहिली से पर्वतीय क्षेत्रों की मजबूत स्टेमना के नौनिहालों को भी खेलों के क्षेत्र में आगे आने का मौका नहीं मिल पा रहा है। जबकि पूर्व में 10 वीं पास छात्र ही स्पोर्टस कोटे से सेना में भर्ती होते रहे हैं।

उम्मीद थी कि शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के पास खेल मंत्रालय होने से स्कूली खेलों की दशा सुधरेगी। मगर, ऐसा दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है।

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