कोविड-19ः स्कूलों में अतिरिक्त सतर्कता की दरकार

कोविड-19ः स्कूलों में अतिरिक्त सतर्कता की दरकार

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देहरादून। कोरोना को लेकर स्कूलों में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है। ये सतर्कता हर स्तर पर होनी चाहिए। एसओपी का धरातल पर अनुपालन की प्रॉपर मॉनिटरिंग होनी चाहिए।

देश में कोरोना का जोखिम कम नहीं हुआ है। ये सच है कि पॉजिटिव मामले एकदम से कम हुए हैं। वैक्सीन आने के बाद कोरोना की दहशत कम हुई है। ये अच्छी बात है और इसे मेंटेन रखा जाना चाहिए। ऐसा सर्तकता से ही संभव होगा।

बावजूद इसके विश्व का अनुभव बताता है कि कई देश में कोरोना पूरी तरह से थमने के बाद फिर से नए रूप में सामने आया। कई देश कोरोना की दूसरी और तीसरे वेव फेस कर रहे हैं। ब्राजील, फ्रांस, अमेरिका समेत कई देश कोरोना से कराह रहे हैं।

सोमवार से राज्य में दर्जा छह से 12 वीं तक के स्कूल पूरी तरह से खुल रहे हैं। इसके लिए शासन ने एसओपी जारी कर दी है। स्कूलों के खुलने के साथ कोरोना का जोखिम भी बढ़ेगा। कम से कम शहरी क्षेत्रों में स्थिति स्कूलों में जोखिम अधिक रहेगा।

ऐसे में जरूरी है स्कूलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। आज से चार-पांच माह पूर्व जिस प्रकार की सतर्कता लोगों में दिखती थी वैसी दिखे। मास्क, दो गज दूरी, साबुन से बार-बार हाथ धोने, गेदरिंग में जाने से बचना आदि को फॉलो किया जाए।

यही नहीं शासन स्तर से स्कूलों के लिए जो एसओपी जारी की गई है उसकी अनुपालन की मॉनिटरिंग जरूर हो। स्कूलों के प्रिंसिपल पृच्छा के बजाए विवेक से जरूर काम लें।

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