सयाणी काकी पहुंची देहरादून! कन बजर पड़ी, देहरादूण अब CR- CR और BAR- BAR

सयाणी काकी पहुंची देहरादून! कन बजर पड़ी, देहरादूण अब CR- CR और  BAR- BAR

गांव में उटपोड़ महसूस करने के बाद सयाणी काकी के मन में विचार आया कि देहरादून जाती हूं। देखूँ शहर कितना बदल गया। आखिर सब बेटी ब्वारी और नौना-बाला देहरादूण-देहरादूण क्यों बल्या रहे हैं। देखूं आखिर अब क्या हो गया देहरादून में।

बस, फिर क्या! वीरू टैक्सी वाले नाती को फोन लगाया। वीरू! कल अपनी गाड़ी तैयार रक्खी । तेरी टैक्सी में ही करूँगी कल देहरादून के दर्शन!” सुबह-सुबह काकी तैयार चांदी जैसे लटलों में तेल लगाया। सुंदा पाटटी की। मन में देहरादूण जानी की उमंग पानी में कंकड़ नवामी जैसी।

पहले काकी को हर मोड़ पर रींग होती थी – तो रींग – रींग से पहले ही सर भारी रहता था। पर मसूरी बैंड तक पहुँचते-पहुँचते रींग बंद और आँखें खुल्लम-खुल्ला। काकी कि आंखे तड़तड़ी हो गई। जैसे जूंरा ने सोए हुए तौल दिया हो।

वीरू डर गया। काकी, आज रींग नहीं हो रही आपको? ठीक तो हो?” काकी बोलीं, क्या रींग बेटा! जो कुछ देख रही हूँ, उसमें तो दिमाग ही घूम रहा है! और मेरी तो रींग ख़तम हो गयी। पेड़ों की जगह हाई-राइज़ अपार्टमेंट, बागों की जगह फाइव-स्टार होटल, और नदियाँ भी बेचारी पाइपलाइन में बदल गईं।

ट्रैफिक ऐसा कि लगता था सारी देहरादून की जनता आज ही घूमने निकली है। इसी बीच काकी की नज़र बड़े-बड़े बोर्डों पर पड़ी एक CR, दो CR, लग्जरी इन थ्री CR। काकी चौंककर बोलीं, “वीरू! हर बोर्ड पर स्यार स्यार किलै होलू लिख्यूं। यख त शेर शेर बोलदा छा। अब सब स्यार-स्यार। वीरू बोला,“काकी, CR मतलब करोड़। अब देहरादून में सब करोड़ों में बिकता है।”

काकी ने माथा पकड़ा अरे कन बजर पड़ी। पहले ये देहरादून शेर था ज़िंदा, हरा-भरा, दमदार! अब तो पूरा का पूरा सीआर हो गया-करोड़ों का दून, नाम ही बदल दो!” और तभी काकी का व्यंग्य का गीजर फटा काकी ने धीरे-धीरे सड़क किनारे बोर्ड देखने शुरू किए नशा मुक्ति अभियान”, “ड्रग्स से दूर रहें”, शराब हानिकारक है” और ठीक उसके बगल में नया खोला हुआ लिकर शॉप, उसके पास एक मिनी-बार, उसके पास वाइन बुटीक, और उसके पास प्रीमियम व्हिस्की स्टोर। काकी भौंचक “ए वीरू! ये क्या दिमाग की दही बनाई है सरकार ने? एक हाथ से बोलते हैं‘नशा मत करो’। दूसरे हाथ से हर मोड़ पर दारू की दुकान खोल देते हैं!

ये तो हुआ जैसे ‘बेटा चीनी मत खा, और लो, दो किलो रसगुल्ले!’” वीरू हँसने लगा।काकी नहीं रुकी “गजब कर दिया रे! कल गाँव में आए थे लोग नशा-मुक्ति का भाषण देने, और अगले दिन चौराहे पर नई दारू की दुकान का फीता काट रहे थे! शायद सरकार कह रही हो दारू से दूर रहो पर दूर जाओगे किधर हर मोड़ पर तो हमने लगा दी है!’”
काकी ने निष्कर्ष सुनाया “देहरादून पहले शेर था अब CR भी है और BARभी। शहर की लाइनों में ट्रैफिक से ज्यादा, लिकर शॉपें खड़ी हैं!” वीरू बस चुपचाप गाड़ी चलाता रहा। क्योंकि काकी की बात में कटाक्ष भी था और सच्चाई भी।

Tirth Chetna

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