संस्कृत विद्यालयों के वर्गीकरण में शिक्षक हितों का रखा जाए ध्यान

संस्कृत विद्यालयों के वर्गीकरण में शिक्षक हितों का रखा जाए ध्यान

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देवप्रयाग। एक साथ संचालित हो रहे संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालयों के वर्गीकरण में शिक्षक हितों का ध्यान रखा जाए। साथ ही संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालयों में कई सालों से प्रधानाचार्य का प्रभार संभाल रहे शिक्षकों को उक्त पद के मुताबिक वेतनमान दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने संस्कृत का द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया। मगर, संस्कृत और संस्कृत शिक्षा केइ इसके अनुरूप राजश्रय अभी तक नहीं मिल सका है। इस पर संस्कृत जगत में निराशा है।

बहरहाल जनपदीय संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालय शिक्षक समिति की पौड़ी इकाई शासन से संस्कृत विद्यालयों की बेहतरी हेतु कुछ मांग की हैं। इकाई के जिलाध्यक्ष डा. एसएन कोटियाल ने संस्कृत शिक्षा निदेशक को ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन में उन्होंने संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालयों के वर्गीकरण पर ध्यान आकृष्ठ किया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्गीकरण में महाविद्यालय के तौर पर अनपयुक्त पाए जाने वाले विद्यालयों के ऐसे शिक्षक जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते हो उन्हें अन्यत्र महाविद्यालय में समायोजित किया जाए। इसके अलावा संस्कृत विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाचार्य का काम देख रहे शिक्षकों को प्रधानाचार्य पद का वेतन दिया जाए।

इससे विद्यालयों को अनुभवी प्रधानाचार्य मिलेंगे और संस्कृत शिक्षा में रोजगार का अवसर बढ़ेगा।

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