ऋषिकेश। भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय शास्त्री दायित्वधारी बनने से एक बार चूक गए या उनके साथ राजनीतिक खेला हो गया। शास्त्री के पास संगठन की मेरिट भी भी और समाज में अच्छी पकड़ भी।
चुनावी साल में भाजपा सरकार की नेता/कार्यकर्ता साध एक्सप्रेस खूब दौड़ रही है। गरज ये है कि 2027 के चुनाव में सभी जोर लगाएं और हैट्रिक बन सकें। इस गरज में कहीं पार्टी के हित झलक रहे हैं तो कहीं देवतुल्य कार्यकर्ताओं के साथ ठेठ राजनीति हो रही है।
तीर्थनगरी ऋषिकेश में ऐसा ही कुछ दिख रहा है। कम से कम भाजपा नेता संजय शास्त्री के साथ तो पार्टी के भीतर से बड़ा खेला हो गया। शास्त्री के पास संगठन की मेरिट भी थी और उनकी सामाजिक पकड़ किसी से छिपी नहीं हैं।
लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनाव में पार्टी उनकी निर्विवाद छवि को कभी नहीं भूलती। उन्हें चुनाव में आगे किया जाता है। मगर, दायित्वधारी बनाते वक्त पार्टी ने उन्हें भूला दिया। जबकि उनका नाम टॉप में बताया जा रहा था। कई स्तरों से चर्चाएं भी थी कि उन्हें दायित्वधारी बनाया जा रहा है। मगर, ऐसा नहीं हुआ।
दरअसल, संजय शास्त्री चुपचाप काम करने वाले नेता है। कई दिग्गज उनकी उपस्थिति मात्र से असहज महसूस भी करते हैं। कई मौकों में उनकी दो टूक भी कई लोगों को रास नहीं आई। इसके अलावा ऋषिकेश के भाजपा नेताओं की एडवोकेसी न के बराबर होती है। राज्य गठन के ऋषिकेश से जो भी दायित्वधारी बने उसकी एडवोकेसी लोकल के स्तर से कतई नहीं हुई।