गांवों के शहरीकरण को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम

गांवों के शहरीकरण को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम

village&cityदेहरादून। प्रदेश सरकार ने नगरों से लगे गांवों को निकायों में शामिल करने का निर्णय क्या लिया पंच प्रधानों में हाई तौबा मच गई है। लोगों को हाऊस टैक्स भय दिखाकर भ्रम फैलाया जा रहा है।

गांव का शहर में तब्दील होना परिवर्तन है। इसे विकास का पैमाना भी है। हर कालखंड में होता रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार ने नगरों से लगे गांवों को निकाय में शामिल करने का सहासिक निर्णय लिया है। इसका पंच प्रधान विरोध कर रहे हैं।

इस विरोध में पढ़ा लिखा तबका कतई शामिल नहीं है। विरोध की वजह किसी से छिपी नहीं है। अधिकांश पंच प्रधानों को इसमें अपनी पॉलीटिकल कॅरियर की चिंता सता रही है। जबकि सच ये है कि निकाय में भी राजनीतिक मैदान हर किसी के लिए खुला है।

राज्य गठन के बाद तमाम ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने इसका लाभ भी उठाया। बहरहाल, आम लोगों को नगर निकाय द्वारा लिया जाने वाले हाऊस टैक्स का भय दिखाया जा रहा है। इस हाऊस टैक्स की हकीकत ये है कि पांच कमरों के घर पर ये टैक्स एक सामान्य व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन पर महीने में कराए जाने वाले रिचार्ज से कम है।

नगर निकाय में शामिल होने पर मिलने वाले लाभ पर कोई चर्चा करने तक के लिए तैयार नहीं हैं। नगर विकास में गांवों के शामिल होने से वहां पर स्ट्रीट लाइट, सफाई और विकास कार्यों की इजी एप्रोच बन जाएगी।

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