ऋषिकेश के हिस्से आए सिर्फ अधिकारियों के दौरे

ऋषिकेश के हिस्से आए सिर्फ अधिकारियों के दौरे
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जनप्रतिनिधियों और सरकार ने साधी चुप्पी

तीर्थ चेतना न्यूज

ऋषिकेश। तीन जिलों के शहर ऋषिकेश (देहरादून, टिहरी और पौड़ी) के हिस्से सिर्फ अधिकारियों के दौरे ही आ रहे हैं। यहां की जरूरतों और भविष्य की प्लानिंग पर जनप्रतिनिधि और सरकार चुप्पी साधे हुए हैं।

ऋषिकेश तीन विधानसभा क्षेत्रों का एक रूप है। इसमें देहरादून जिले की ऋषिकेश, टिहरी जिले की नरेंद्रनगर और पौड़ी जिले की यमकेश्वर विधानसभा सीट शामिल है। इन तीनों विधानसभा के प्रतिनिधि कभी तीन जिलों के शहर ऋषिकेश की बेहतरी के लिए एक साथ नहीं बैठे।

इसका सीधा-सीधा लाभ तीनों जिलों की प्रशासनिक मशीनरी को होता है। यही वजह है कि ऋषिकेश का आशातीत विकास नहीं हुआ। इसको एक प्रशासनिक इकाई यानि जिला बनाने के लिए कभी जनप्रतिनिधियों ने आवाज नहीं उठाई। दरअसल, जनप्रतिनिधियों के भीतर एक तरह से जिला बनने पर राजनीतिक भय है।

यही वजह है कि उत्तराखंड का कोई विधायक जिले की बात नहीं करता। बहरहाल, यही स्थिति सरकार की भी। ऋषिकेश को पौड़ी, टिहरी और देहरादून के आइने से देखना सरकार के लिए लाभ का सौदा साबित होता है।

तीन जिलों का थोड़-थोड़ा विकास के छीटे यहां डाल दिए जाते हैं। इन दिनों शासन के अधिकारी ऋषिकेश के खूब चक्कर काट रहे हैं। वजह तहसील स्तरीय व्यवस्था से चारधाम यात्रा नहीं संभल रही है। तीनों जिलों का यही हाल है।

ये संभव भी नहीं है। बावजूद इसके शासन ऋषिकेश को अलग प्रशासनिक इकाई बनाने के नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं। चारधाम यात्रा और कावंड़ निपटने के बाद आलाधिकारी यहां झांकने नहीं आते। तब उन्हें ऋषिकेश की जरूरतों का ध्यान ही नहीं रहता। ऋषिकेश की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए सिर्फ कहीं नाका बांधना तो कहीं सिपाही खड़े करने के अलावा कुछ नहीं होता।

Tirth Chetna

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