टिहरी विकिरण जागरूकता पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

टिहरी विकिरण जागरूकता पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

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नई टिहरी। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बादशाहीथौल स्थित एसआरटी परिसर में रेडिएशन अवेयरनेस एंड डिटेक्शन इन नेचुरल एन्वॉयरन्मेंट विषय पर तीन दिवसीय सम्मेलन शुरू हो गया।

गवर्नमेंट पीजी कॉलेज,नई टिहरी एवं हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय ,स्वामी रामतीर्थ परिसर आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन सम्मेलन का गुरूवार को राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला नई दिल्ली के निदेशक डॉ. डीके असवाल ने शुभारंभ किया।

इस मौके पर उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय के विकिरण संरक्षण एवं जागरूकता कार्यकर्म में योगदान को सराहा। अ विकिरण के दुष्प्रभाव एवं उपयोगिता पर सेमीनार में उपस्थित सभी प्रतिभागियों के साथ विस्तृत रूप से चर्चा की उन्होंने यह भी कहा कि विकिरण शोध में मापन की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना होगा जिससे की शोध की उपयोगिता बनी रहे।

प्रोफेसर आरसी रमोला ने भारत में रेडॉन शोध नेटवर्क के विकाश एवं इसकी गतिविधियों से विश्व भर के वैज्ञानिकों को अवगत कराया नई टिहरी पीजी कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रेनू नेगी ने अपने स्वागतीय भाषण में सम्मलेन में प्रतिभाग करने वाले सभी वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

गढ़वाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अन्नपूर्णा नौटियाल ने सेमीनार में प्रतिभाग करने वाले देश विदेश के सभी वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को तीन दिवसीय सम्मलेन के लिए शुभकामनाएं प्रेसित की ,साथ ही कुलपति महोदया ने इस सम्मलेन से सामज के लोगों में विकिरण जागरूकता का सन्देश दिया जिससे की स्वास्थ्य में विकिरण सम्बन्धी दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा सके ,सम्मलेन के मुख्य वक्ता कनाडा की पेम वर्किंटन कैनेडियन रेडॉन मॉनिटरिंग के बारे में जानकारी दी।

सम्मलेन के प्रथम दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता हंगरी के वैज्ञानिक तिबोर कोवेक्स एवं जापान के वैज्ञानिक एस. के. शाहू ने संयुक्त रूप से की ,इस सत्र में इटली के वैज्ञानिक फ्रांसिस्को ने अपने व्याख्यान में बताया की कैसे कार्यस्थलों एवं घरों में विकिरण के उत्सर्जन से बचा जा सकता है और इसके लिए क्या क्या आवश्यक कदम उठाये जा सकते हैं।

आयरलैंड के वैज्ञानिक मैक्लोकिन ने रेडियोएक्टिव गैस रेडॉन द्वारा वातावरण में उत्सर्जित विकिरण की मात्रा के बारे अपना शोध साझा किया। प्रथम दिवस के द्वितीय सत्र में पोलैंड के वैज्ञानिक कोजेक ने साइक्लोट्रोन द्वारा उत्सर्जित गामा विकिरण के बारे में अपना अनुभव साझा किया।

कैमरून के वैज्ञानिक शैडो एवं जर्मनी वैज्ञानिक पीटर ने विकिरण शोध के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान हेतू अंतराष्टीय स्तर पर सटीक योजना बनाने पर पर जोर दिया। सम्मलेन के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पी डी सेमल्टी एवं मिजोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आर सी तिवारी ने की।

सम्मेलन के प्रथम दिवस का संचालन सम्मलेन के समन्वयक डॉ कुलदीप सिंह ने किया इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ डी पी एस भंडारी ,डॉ जयेन्द्र सजवाण ,डॉ संदीप बहुगुणा ,डॉ गुरुपद सिंह गुसाईं ,श्री सुभाष चंद्र नौटियाल ,श्री अजय बहुगुणा ,श्री नवीन रावत ,डॉ साक्षी शुक्ला,डॉ माधुरी कोहली ,डॉ पूजा रावत ,डॉ शालिनी रावत , एवं पुस्तकालय अध्यक्ष हंसराज बिष्ट एवं महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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