ऋषिकेश। यमकेश्वर विधानसभा का राजनीतिक मिजाज अबकी बार बदला-बदला सा दिख भी रहा है और महसूस भी हो रहा है। इस बदले मिजाज का असर ऋषिकेश पर भी खूब देखा जा रहा है।
राज्य गठन के साथ अस्तित्व में आई यमकेश्वर विधानसभा राजनीतिक तौर पर भाजपा के गढ़ के रूप में स्थापित हो चुकी है। तमाम चुनावों के परिणाम इस बात के प्रमाण माने जा सकते हैं। सन 2000 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा पौड़ी जिले की आठ में से सात सीटें हार गई थी। यमकेश्वर ने भाजपा की लाज बचा ली।
इसके बाद भाजपा 2007, 12, 17 और 2022 के चुनाव में यहां अपना विधायक बनाने में सफल रही। 2017 और 22 में पार्टी ने यहां प्रत्याशी भी बदले। बावजूद उसके वोटों पर कोई असर नहीं पड़ा। यानि यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित हो चुका है। हालांकि सभी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के स्तर से रणनीतिक चूक भी सामने आती रही हैं।
बहरहाल, 2027 के चुनाव की तैयारियों के बीच यमकेश्वर विधानसभा का राजनीतिक मिजाज खासा बदला-बदला दिख भी रहा है और महसूस भी हो रहा है। दरअसल, गढ़वाल के द्वार ऋषिकेश की राजनीतिक गतिविधियों का संदेश सबसे पहले न केवल यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचता है बल्कि प्रभावी होता है।
2022 से अभी तक की तमाम छोटी बड़ी घटनाएं/ परिघटनाओं का यहां असर साफ-साफ दिख रहा है। यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र कई घटनाओं का साक्षी भी रहा है। भारतीय जनता पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता भी इसे खुलकर बोल रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकार भी अब काफी कुछ महसूस करने लगे हैं।
धीरे-धीरे बोल कोई सुनना ले की तर्ज पर जनता के बीच अच्छी छवि वाले पार्टी नेताओं को प्रमोट किया जाने लगा है। उक्त नेताओं की क्षेत्र में सक्रियता भी काफी कुछ बयां कर रही है। यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक मिजाज के बदलाव का सबसे अधिक असर ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में भी देखा और महसूस किया जा सकता है। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में कई प्रकार की बातें भी खूब सुनाई दे रही हैं।