पुरानी पेंशनः मांग का टेंपो बना रहा तो मजबूर होंगे राजनीतिक दल

पुरानी पेंशनः मांग का टेंपो बना रहा तो मजबूर होंगे राजनीतिक दल

- in ऋषिकेश
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ऋषिकेश। देश भर के सरकारी शिक्षक /कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग का टेंपो ऐसा ही बना रहा तो राजनीतिक दल जल्द इस पर गौर करने के लिए मजबूर होंगे।

उल्लेखनीय है कि 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए सरकारी शिक्षक/कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। देश भर के कर्मचारी विभिन्न बैनर तले इसको लेकर आंदोलनरत हैं। पॉलिटिकल क्लास पर शिक्षक/कर्मचारियों का आंदोलन धीरे-धीरे असर दिखने लगा है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का एनपीएस में बार-बार संशोधन करना इस बात का प्रमाण भी है। बहरहाल, भाजपा समेत तमाम राजनीतिक दल अब इसके नफा-नुकसान को तौलने लगे हैं। यानि आंदोलन ने असर दिखाना शुरू कर दिया है।

यदि देश भर के शिक्षक/कर्मचारियों का पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन का टेंपो ऐसा ही बना रहे तो राजनीतिक दल इस पर गौर करने और इसके मुददा बनाने को मजबूर होंगे। हालांकि कुछ गैरराजनीतिक संगठनों के माध्यम से इस आंदोलन को कमजोर करने के प्रयास भी हो रहे हैं।

ठसके लिए पब्लिक डोमेन में तमाम तर्क गढ़े जा रहे हैं। निजीकरण की एडवोकेसी ये कहते हुए की जा रही है कि सरकारी सिस्टम में काम नहीं होता। जनता के बीच सरकारी कर्मचारियों की गलत छवि बनाकर ऐसा किया जा रहा है।

इससे सावधान और तर्कपूर्ण जवाब देकर यदि सरकारी शिक्षक/कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन का टेंपो बनाने में सफल रहे तो सफलताअब ज्यादा दूर नहीं है।

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