पुरानी पेंशन की मांग पर क्यों नहीं पसीज रही सरकारें

पुरानी पेंशन की मांग पर क्यों नहीं पसीज रही सरकारें

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पौड़ी। आखिर देश की तमाम राज्य सरकारें और केंद्र सरकार शिक्षक/कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर क्यों नहीं पसीज रही हैं। इसको लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि 2004 के बाद सरकारी सेवा में आए देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र सरकार के शिक्षक/कर्मचारियों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके स्थान पर एनपीएस लागू किया गया है। वक्त के साथ एनपीएस की हकीकत सामने आने लगी है।

ये सेवानिवृत्त कर्मचारी के सामाजिक सुरक्षा की गारंटी कतई नहीं है। ऐसे में देश भर के शिक्षक/कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। देश भर में कर्मचारी गांधीवादी तरीके से आंदोलन और तमाम माध्यमों से अपनी मांग को सरकार तक पहुंचा चुके हैं। बावजूद न तो कई राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार करोड़ों शिक्षक/कर्मचारियों की इस मांग पर पसीज रहे हैं।

दरअसल, शिक्षक/कर्मचारियों की इस मांग का कभी चुनाव पर असर देखने को नहीं मिला। यही वजह है सत्ता पक्ष और विपक्ष को इसमें खास रूचि नहीं है। हां, शिक्षक/कर्मचारियों को बहलाने के लिए चिटठी पत्री जरूर लिखी गई।

इसके अलावा जनता के वोट से देश को चलाने का अधिकार पाने वाले सत्ताधीशों को अब कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन अखरती है। वो इसे अनुउत्पादक बताकर इससे बचने की जुगत करते हैं।

शिक्षा, चिकित्सा समेत तमेत तमाम सेक्टर्स में बह रही प्राइवेट की बयार इसी का परिणाम है। हालांकि इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। जबकि सांसद/विधायकों को पेंशन की सुविधा उनके शपथ लेते ही मिल जाती है। इसको लेकर सवाल खड़े तो हो रहे हैं। मगर, इस पर गौर नहीं हो रहा है।

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