ऋषिकेश की उम्मीदों पर तुषारपात, एक धेला नहीं बढ़ा

ऋषिकेश की उम्मीदों पर तुषारपात, एक धेला नहीं बढ़ा
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ऋषिकेश। नगर निगम ऋषिकेश की उम्मीदों पर तुषारपात हुआ है। निगम के लिए वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही हेतु अवमुक्त धनराशि में पिछले वर्ष की तुलना में एक धेले की भी बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।

राज्य शासन ने आठ नगर निगमों के लिए पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुति के आधार पर वित्तीय वर्ष 2022-23 की प्रथम त्रैमासिक किस्त के रूप में 82 करोड़ 94 लाख 49 हजार रूपये अवमुक्त किए हैं। इसमें सात नगर निगमों की धनराशित में पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ोत्तरी की गई है। जबकि ऋषिकेश नगर निगम का एक भी धेला नहीं बढ़ाया गया।

कोटद्वार नगर निगम पर इस बार खास मेहरबानी हुई है। ऋषिकेश के साथ ये नाइंसाफी लगातार हो रही है। नगर पालिका से नगर निगम बनने के बाद निकाय के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी हुई। खर्चों का आकार बढ़ गया। मगर, शासन के स्तर से बजट उस अनुपात में नहीं बढ़ाया गया। इस बार कुछ खास वजह से उम्मीद थी कि ऋषिकेश नगर निगम पर शासन की नजरें इनायत होंगी। मगर, ऐसा नहीं हुआ।

राजनीतिक तौर पर भाजपा को हर स्तर पर मजबूत करने वाली तीर्थनगरी के साथ इस व्यवहार से हर कोई हतप्रभ है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष मनीष शर्मा का कहना है कि ये ऋषिकेश के साथ संस्थागत अन्याय है।

जिस व्यक्ति को ऋषिकेश ने चार बार विधायकी का चुनाव जीताया। जो राज्य का शहरी विकास और वित्त मंत्री हो इसके बावजूद नगर निगम की शासन स्तर से हो रही उपेक्षा को क्या कहना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि ऋषिकेश नगर निगम को छोड़कर सभी निगमों को गत वर्ष के मुकाबले अधिक धनराशि दी गई। ऋषिकेश के लोगों को गौर करना चाहिए।

पार्षद मनीष मनवाल का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक के शहरी विकास और वित्त मंत्री होने की वजह से उम्मीद थी कि इस बार नगर निगम को लाभ होगा। मगर, ऐसा नहीं हुआ। ऋषिकेश नगर निगम के पार्षदों को इस पर आवाज उठानी चाहिए।

Tirth Chetna

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