पुरानी पेंशन बहाली को सरकारी शिक्षक/ कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज

पुरानी पेंशन बहाली को सरकारी शिक्षक/ कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज

- in ऋषिकेश
0

ऋषिकेश। पुरानी पेंशन बहाली के लिए 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए सरकारी कर्मचारियों ने आवाज बुलंद कर दी है। इसमें सभी कर्मियों का सहयोग मिल रहा है। राजनीतिक व्यवस्था पहली बार सोचने को मजबूर हुई है।

60 साल की उम्र तक देश की सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के बाद सामाजिक सुरक्षा देने हेतु पेंशन का प्रावधान रहा है। पेंशन वास्तव में मजबूत सामाजिक सुरक्षा देती है। यही नहीं सेवानिवृत्त कर्मचारी स्वयं को सुरक्षित भी महसूस करता है। मगर, 2005 के बाद सरकारी सेवा में आने वाले शिक्षक/कर्मचारी के लिए ऐसी सुरक्षा नहीं है।

2003-04 में सरकारी शिक्षक/कर्मचारियों से सामाजिक सुरक्षा का ये कवच केंद्र की तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने छीना। पेंशन के स्थान पर शिक्षक/कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था एनपीएस लागू की गई है। बाजार के जोखिम पर आधारित इस योजना के बारे में जो बातें सामने आ रही हैं उसे कर्मचारी स्वयं के साथ धोखा बता रहे हैं।

पिछले पांच-छह साल से देश भर में कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इस पर सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं। वजह शिक्षक/कर्मचारियों ने वोट के रूप में अपनी ताकत नहीं दिखाई। मगर, अब ऐसा नहीं होगा। पेंशन के लिए शिक्षक/कर्मचारियों ने आवाज बुलंद कर दी है।

उत्तराखंड राज्य में तो एनपीएस वाले शिक्षक/कर्मचारियों की संख्या इतनी हो गई है कि चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। इस बार ऐसा दिखने भी लगा है।

कल तक पेंशन के विरोध में तर्क देने वाले विधायक/मंत्री अब चिटठी लिखने को तैयार हो गए। हालांकि वो मन से चिटठी नहीं लिख रहे हैं। कांग्रेस समेत विपक्ष के तमाम राजनीतिक दल भी इस मामले में संदेह के घेरे में हैं।

भाजपा का इसको लेकर जो विचार है वो हैरान करने वाला है। पार्टी एक संस्था के अल्प वेतन वाले शिक्षकों का तर्क देती है। मगर, अब इन तर्कों पर शिक्षक/कर्मचारियों की आवाज भारी पड़ने वाली है।

यह भी पढ़ेः 48 घंटे में देहरादून से रूद्रप्रयाग नहीं पहुंचा मैक्स वाहन, आशंका

यह भी पढ़ेः आस दे रहा टीबी से मुक्ति के अभियान को गति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

भाजपा उत्तराखंड से किसे भेजेगी राज्य सभा

देहरादून। भाजपा उत्तराखंड के किस नेता को राज्य