…..तो एलटी शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय

…..तो एलटी शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय

teacherएलटी यानि टीजीटी शिक्षकों के साथ उत्तराखंड में अन्याय हो रहा है। उनके प्रमोशन पर भ्रम और चयन वेतनमान के नाम पर उनके साथ ठगी जैसे हो रही है।

आम तौर पर माना जाता है कि एलटी शिक्षक प्रमोशन पाकर प्रवक्ता बनता है। मगर, ये प्रमोशन नहीं है। इसे विभाग की भाषा में विषयगत लाभ कहा जाता है। इस विषयगत लाभ ने प्रमोशन के नाम पर भ्रम पैदा कर दिया है। कुछ शिक्षकों को ये लाभ एलटी में तीन-चार साल की सेवा में ही मिल जा रहा है तो कुछ को 20-25 साल बाद भी देखते रहते हैं।

ऐसा क्यों है। इसका जवाब विभाग में हुई गड़बड़झाला नियुक्तियों में छिपा है। आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ेगी। कारण बेसिक से एलटी में पहुंच रहे शिक्षकों की तादाद लगातार बढ़ रही है। आगे चलकर प्रमोशन और प्रोन्नत वेतन को लेकर तकनीकी दिक्कतें आएंगी।
एलटी से प्रवक्त पद पर होने वाले कथित प्रमोशन के तौर तरीके भी समस्या को और बढ़ा रहे हैं।

प्रमोशन का ये भ्रम विभाग के अधिकारी इसलिए बनाए हुए हैं ताकि एलटी शिक्षकों का फोकस प्रमोशन के पहले पद यानि हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक पर न हो।

ऐसा हुआ तो एलटी के शिक्षक 10 साल की सेवा के बाद पदोन्नत पद का चयन वेतन मांगेंगे। विभागीय अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर इस बात में वनज स्वीकारते हैं। इस मांग पर अब एलटी शिक्षक एकजुट हो रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि ये मामले कोर्ट तक पहुंच जाए।

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