माध्यमिक स्कूलों का मूल पद तो एलटी ही है

माध्यमिक स्कूलों का मूल पद तो एलटी ही है

teacherएलटी शिक्षकों के लिए हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक पद पर 55 प्रतिशत कोटे को लेकर भले ही सवाल खड़े किए जा रहे हों। मगर, सच ये है कि माध्यमिक स्कूलों का मूल पद एलटी है न कि प्रवक्ता।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 1977 तक माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के पद स्पेशल सबऑर्डिनेट एजुकेशन सर्विस के तहत भरे जाते थे। तब प्रवक्ता पद नाम होता ही नहीं था। नौ वीं 10 वीं और 11 वीं 12 वीं को पढ़ाने वाले दोनों शिक्षकों के पद नाम सहायक अध्यापक होते थे।

एलटी में तैनात शिक्षक सहायक अध्यापक-विषय का नाम लिखते थे। जबकि प्रवक्ता सहायक अध्यापक-विषय इंटर लिखते थे। 1977-78 में सरकार ने शिक्षकों के आंदोलन के बाद 11 वीं और 12 वीं को पढ़ाने वालों को प्रवक्ता पद नाम दिया।

जबकि एलटी का पद नाम पूर्ववत रखा गया। प्रधानाध्यापक पद पर एलटी का 55 प्रतिशत कोटा उससे पहले से चल रहा है। इस कोटे का विरोध यूपी के दौरान वर्ष 1991 में भी हुआ। तब उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले एलटी शिक्षकों को भी प्रवक्ता कंसीडर करने का निशाना साधा तो प्रवक्ता अपनी मांग से पीछे हट गए।

उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों के लिए प्रधानाध्यापक पद पर 55 प्रतिशत कोटे के विरोध को लेकर जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। विभाग के जानकार अधिकारी इस विरोध से हतप्रभ हैं। कारण उन्हें लगता है कि इससे एलटी-प्रवक्ता-प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य के पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया प्रभावित होगी। साथ ही बात निकली है तो दूर तक जाएगी।

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