…. और इंटर कॉलेजों में सृजित नहीं हो सका प्रवक्ता खेल का पद

…. और इंटर कॉलेजों में सृजित नहीं हो सका प्रवक्ता खेल का पद

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पौड़ी। राज्य के इंटर कालेजों में खेल प्रवक्ता का पद सृजित करने की खूब चर्चा हुई। मांग हुई और जिम्मेदार पदों पर आसीन लोगों के स्तर से गौर करने का आश्वासन भी मिला। मगर, बात आगे नहीं बढ़ सकी।

ये किसी से छिपा नहीं है कि मौजूदा दौर में खेल/शारीरिक व्यायाम किसी भी विषय से ज्यादा महत्वपूर्ण है। किसी भी विषय में बहुत अच्छा परफार्म न कर सकने वाला नौनिहाल यदि शारीरिक रूप से स्वस्थ होगा तो देश की बेहतरी में अधिक योगदान दे सकेगा।

इसको लेकर देश में एक अभियान भी चल रहा है। संभवतः इसी अभियान के मददेनजर राज्य के इंटर कालेजों में खेल प्रवक्ता के पद सृजित करने की चर्चाएं हुई थी। इसको लेकर गवर्नमेंट स्कूलों में तैनात खेल शिक्षकों ने कई मंचों पर मांग भी की।

मांग पर आश्वासन भी मिला। कांग्रेस शासन में ये बात सामने आई थी कि फाइल चल रही है। भाजपा शासन के शिक्षा और खेल मंत्री एक ही होने से उम्मीद बनी थी ि कइस दिशा में जरूर कुछ ठोस होगा। मगर, चार साल बाद प्रवक्ता खेल का पद सृजित करने को लेकर कोई सूचना शिक्षा विभाग के स्तर पर नहीं हैं। प्रवक्ता खेल का पद सृजित न होने से खेल और शिक्षा में घालमेल हो रहा है।

वर्षों तक छात्रों को खेल की बारीकियां, स्वस्थ रहने के टिप्स देने वाले खेल शिक्षकों को 20-25 साल की सेवा के बाद उनकी मास्टर डिग्री के आधार पर अन्य विषयों में प्रमोशन दिया जा रहा है। इससे योग्य खेल शिक्षक सेवा काल के अंतिम वर्षों में ऊहापोह की स्थिति में रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि प्रवक्ता खेल का पद सृजित हो या इसके समान कोई व्यवस्था बनें। ताकि खेल शिक्षकों के अनुभव का लाभ उनकी पूरे सेवाकाल में नौनिहालों को मिलता रहे।

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