परमार्थ निकेतन में वैश्विक आध्यात्मिक योग महाकुंभ का शुभारंभ
80 देशों को डेढ़ हजार योग साधक कर रहे प्रतिभाग
तीर्थ चेतना न्यूज
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में वैश्विक आध्यात्मिक योग महाकुंभ 2026 का शुभारंभ हो गया। इसमें 80 देशों को डेढ़ योग साधक प्रतिभाग कर रहे हैं। योग महाकुंभ के शुभारंभ के मौके पर दो दर्जन से अधिक देशों के राजदूत और उच्चायुक्त मौजूद रहे।
वर्ष 1989 से शुरू हुआ योग महोत्सव का क्रम साल दर साल भव्य और दिव्य हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सवा ने तीर्थनगरी ऋषिकेश के साथ व्यापक पहचान जोड़ दी है। बहरहाल, योग महोत्सव के प्रथम दिन गंगा जी की आरती के दौरान योग साधकों ने संगीत, योग, मल्लखंभ केअनोखे संगम का भरपूर आनंद लिया। पावन माँ गंगा के तट पर प्रातःकाल से लेकर सायंकाल तक आयोजित योग सत्रों, आध्यात्मिक प्रवचनों, वैदिक अनुष्ठानों से ओतप्रोत रहा।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि सांसों की पवित्र लय के साथ योग महोत्सव का शुभारंभ विश्व को बड़ा संदेश देगा। हिमालय की गोद और माँ गंगा के पवित्र तट पर आरम्भ हुआ यह महोत्सव पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ने वाला वै-िरु39यवक आध्यात्मिक संगम है।
कहा कि योग महोत्सव का उददेश्य केवल योग का अभ्यास कराना ही नहीं, बल्कि मानव चेतना को जागृत करना और मानवता को एकत्व प्रदान करना है। पावन गंगा तट पर गूंजते मंत्र, ध्यान की गहराई, योग की साधनाऔर भक्ति की मधुर ध्वनियाँ मिलकर ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित कर रही हैं, जहाँ प्रत्येक साधक अपने भीतर की शांति और दिव्यतासे जुड़ने का अनुभव कर रहा है।
कहा कि योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि मानवता को एक परिवार के रूप में जुड़ने का मार्ग है। योग हमें संदेश देता है कि हमअलग-ंअलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के अंश हैं।
योग महोत्सव की निदेशक डा साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि आज वि-रु39यव में जो भी चुनौतियाँ, अन्याय या असंतुलन दिखाई दे रहा हैं, उनके प्रति जो क्रोध या निराशा हमारे भीतर उठती है, उसे अपने हृदय के द्वार पर दस्तक समझें। यह संकेत है कि कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ा हुआ है। फिर ऐसी साधना विकसित करें, जिसके माध्यम से आप उस क्रोध या निराशा को ईश्वर अथवा प्रकृति को समर्पित कर सकें।
दिन भर प्रतिभागियों ने योग की अनेक विधाओं का अनुभव किया, जिनमें मंत्र योग, चक्र बैलेंसिंग विन्यास, विन्यास योग, हृदय-ंउचयकेंद्रित ध्यान सत्र, कुंडलिनी योग तथा योग और दर्शन पर चर्चाएं शामिल
