राजनीति के रंगों से सराबोर रही इस बार की होली
तीर्थ चेतना न्यूज
ऋषिकेश। इस बार होली के रंग राजनीति के रंग के सामने फीके-फीके नजर आए। राजनीति ने होली को अपने रंगों से खूब सराबोर किया। होली के हर कार्यक्रम राजनीति का स्पेस अधिक नजर आया।
बुरा न मानो होली है जैसा इस बार कुछ-कुछ होता है कि तर्ज पर दिखा। लोगों ने बुरा भी माना और लगे हाथ शिकायत भी कर दी। होली कार्यक्रमों के कनेक्शन भी देखे गए। गरज ये कि कहीं कोई राजनीति से संबंधित खूफिया इनपुट मिस तो नहीं हो गया।
दरअसल, इस बार की होली पर राजनीति हर स्तर तक हावी नजर आई। रंग की थाल और पिचकारी में भरे रंग पर भी थ्री डी आकृति का कमाल दिख रहा था। दिखाने को होली के सौहार्द ने अपना दायरा बढ़ाया। मगर, इसमें सौहार्द को दिखाने भर की गरज नजर आई।
डरी-डरी राजनीति ने इस बार की होली पर भी डर का खूब रंग चढ़ाया। रह रहकर मार्च का महीना उत्तराखंड की राजनीति को याद आता रहा है। गंगा के तट पर कही-सुनी माफ करने का अंदाज इन दिनों खासी चर्चा में है।
होली में राजनीति का रंग कितना गहरा था इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजनीतिक दलों के अंदर की राजनीति, राजनीतिक दलों की छुटटा राजनीति, सम्मेलन राजनीति, डर दिखाने की राजनीति, मीडिया की राजनीतिक, समाजसेवियों की राजनीति, व्यापार की राजनीति, बड़ी-बड़ी राजनीति को साधने वालों की राजनीति सबने इस होली में अच्छे रंग छोड़ा।
इस रंग में रंगने को 2027 की तैयारियों में लीन नेताओं ने भी स्वयं का रंगने में भलाई समझी। हालांकि कुछ नेताओं से इस उपक्रम को करने में भी चूक हो गई। नेताओं के समर्थक इस चूक को व्यस्तता बताकर सवाल उठाने वालों की नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि नेता कुटीर वालों का कुछ और ही कहना है। जो भी इस बार की होली मंे राजनीति के रंगों ने कमाल दिखाया। ये रंग 2027 के विधानसभा चुनाव तक बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी कर गए।
