बुरा न मानो होली है

बुरा न मानो होली है

हिन्दी न्यूज पोर्टल www.tirthchetna.com/ हिन्दी साप्ताहिक तीर्थ चेतना के पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं। तीर्थ चेतना की बेहतरी में आपके सहयोग हेतु आभार। बुरा न मानो होली है। होली की नजर से आपको जैसा देखा/समझा उसे हंसी मजाक में टाइटिल के रूप में प्रस्तुत किया है।

1. प्रो. कल्पना पंत-श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी का अभिमन्यू।
2. प्रो. पंकज पंत- सादगी तुम्हें जिन्हें नहीं देगी, इस दौर में जीना है….।

3. प्रो. केएन बरमोला-लिखने वाले ने लिख डाले…….।

4. प्रो. मधु थपलियाल- तेरी महफिल में किस्मत……।
5. प्रो. आशीष थपलियाल-तू नही ंतो कुछ भी नहीं…….. ।

6. डा. मंजू भंडारी- मेरे जैसे होंगे लाखों………।
7. विनोद नेगी- पत्थर के सनम तुझे हमने…. ।

8. डा. तनु बाली- टीकाकार ।

9. डा. पंकज बहुगुणा- मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी-कभी……।
10. डा. प्रतिभा बहुगुणा-लाती है ऐसे मोड़ पर किस्मत कभी-कभी।

11. डा. नीलम ध्यानी- छुप गए सारे नजारे….।
12. अनिल ध्यानी-हजारों गम हैं इस दुनियां में अपने भी और पराए भी।

13. श्रीमती संजू गैरोला-जन्म-जन्म का साथ है…….।
14. हेमंत गैरोला- दिल में तुझे बिठाके…………. ।

15. श्रीमती लक्ष्मी बड़थ्वाल-ये कहां आ गए हम……..।

16. सुनयना बिजल्वाण- तू इस तरह से मेरी जिंदगी में……।
17. सुरेंद्र दत्त बिजल्वाण- ये मुलाकात इक बहाना है……..।

18. इंदु बाला गौड-जाने क्या बात है………।
19. बृज मोहन गौड़-बीते हुए लम्हों की कसक साथ है।

20. पुनीता झल्डियाल-ये मस्त हवा ये तो बता……।
21. रमेश झल्डियाल – तेरा साथ है तो मुझे क्या….।

22. अनीता रावत-धूप हो, छाया हो… तेरा- मेरा साथ रहे।
23. जयदीप रावत – मै ना भूलुंगा इन रश्मांे को इन……।

24. रेखा देशवाल- तुझसे नाराज नहीं जिंदगी……..।

25. श्रीमती जगदंबा कंडारी- अंखियों के झरोखें से मैने…….।
26. जितेंद्र कंडारी-तुन्हें काजल लगाया दिन में रात हो गई।

24. अनुपमा बडोला-ं तुझे जीवन की डोर से बांध…………।
25. राजेश बडोला-ं कभी तेरा दामन न छोड़ेंगे………।

26. प्रकाश बहुगुणा- कुछ कहता है सावन………..।

27. नेहा पंचभैया- फूल आहिस्ता………..।

28. भारती रावत- किसी राह में किसी मोड़ पर…..।

29. श्रीमती लक्ष्मी भद्री- नीले गगन के तले…….।
30. जय प्रकाश भद्री-ये प्यार में डूबी हुई रंगीन ……..।

31. स्नेहलता ध्यानी- दिल की ये आरजू थी…..।
32. विनोद ध्यानी- जिसके सपने हमे रोज आते रहे……।

33. विनीता कोटियाल-मेरी मंजिल है………..।
34. विमल कोटियाल-तुम अगर साथ देने का……।

35. रूचि चमोली-तुम्हारी नजर क्यों खफा हो गई।
36. राजेश चमोली-शौक से तू मेरा इम्तहान ले……..।

37. अंजलि रावत-सुन साहिबा सुन………….।
38. सुमन रावत-ये मंजिलें हैं कौन सी न हम समझ……।

Tirth Chetna

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