खुशखबरीः इंटरनेट पर हिन्दी की दमदार उपस्थिति

खुशखबरीः इंटरनेट पर हिन्दी की दमदार उपस्थिति

डा. श्वेता भट्ट
तमाम उपेक्षाओं को झेलते हुए हिन्दी इंटरनेट पर भी अपना मुकाम बनाने लगी है। भारत में इंटरनेट पर हिन्दी अंग्रेजी पर भारी पड़ रही है। अन्य क्षेत्रीय भाषा भी बेहतर स्थिति में हैं।

हिन्दी देश और परदेशी में बेचारगी के खोल से बाहर निकलने लगी है। आम बोलचाल से लेकर लेखन में हिन्दी के उपयोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जरूरत की वजह से बाजार भी अब हिन्दी का गुणगान करने लगा है।

भारत में इंटरनेट पर हिन्दी के उपयोग करने वालों की संख्या में जबरदस्त ईजाफा हुआ है। ग्रामीण भारत और गैर मेट्रो क्षेत्र में हिन्दी की स्थिति इंटरनेट पर खासी मजबूत है। ताजा आंकड़ा बताता है कि भारत में इंटरनेट पर हिन्दी का उपयोग अंग्रेजी से अधिक हो रहा है। यानि हिन्दी अंग्रेजी पर भारी पड़ रही है।

भारत के साइबर वर्ल्ड में हिन्दी का उपयोग करने वालों का आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। भारत की क्षेत्रीय भाषाओ का उपयोग भी लगातार बढ़ रही है। हाल ही हुए एक सर्वे में इसका खुलासा हुआ। सर्वे में ये देखा गया कि आखिर देश के साइबर स्पेस में भाषाओं के उपयोग की स्थिति क्या है।

इसमें हिन्दी प्रथम स्थान पर रही। साइबर स्पेस में हिन्दी का उपयोग 50 प्रतित से अधिक लोग कर रहे हैं। मराठी, कन्नड, बंग्ला, गुजराती आदि भाषाएं अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। हिन्दी समेत क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति लोगों की रूचि शुभ संकेत है।

इंटरनेट पर हिन्दी से संबंधित वेब पोर्टल की संख्या बढ़ रही है। हिन्दी को जानने और समझने में विश्वर भर में लोगों की रूचि बढ़ रही है। विश्व स्तर पर भी हिन्दी की स्वीकार्यता बढ़ी है। हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस की धूम इस बात का प्रमाण भी है।

अप्रवासी भारतीयों की इसमें खास भूमिका है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि विश्व भर में हिन्दी के पक्ष में जबरदस्त माहौल बन रहा है। विश्व के तमाम विश्वविद्यालयों में हिन्दी न केवल पढ़ाई जा रही है बल्कि इस पर शोध भी हो रहे हैं। फिजी गणराज्य तो हिन्दी को ऑफिशियली लैंग्वेज बना चुका है।

साइबर स्पेस से लेकर विश्व स्तर पर हिन्दी की धाक बढ़ रही है। ऐसे में अब भारत में हिन्दी को लेकर रोने धोने वाले अंदाज को समाप्त करना होगा। इस पर अंग्रेजी को प्रश्रय देने की मन स्थिति बदलनी होगी। ताकि हिन्दी विश्व भर में सेतु भाषा के रूप में विकसित हो सकें।

 

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