पहाड़ी राज्य के भूगोल को बदलने की तैयारी

पहाड़ी राज्य के भूगोल को बदलने की तैयारी

सम्राट पंवार
अच्छे दिनों का सपना दिखाने वाली भाजपा पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का भूगोल बदलने की तैयारी कर रही है। अभी तक पर्दे के पीछे और आरएसएस के माध्यम से चल रही उसकी ये कवायद अब संस्थागत रूप में सामने आ गई है।

हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर को उत्तराखंड पर थोपकर पहाड़ी राज्य की अवधारणा को चोट करने वाली भाजपा को अब पहाड़पन से चिढ़ होने लगी है। राज्य में पहाड़ का प्रभावी होना उसे रास नहीं आ रहा है।

पहाड़ के प्रभाव को निष्प्रभावी बनाने के लिए भाजपा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले और बिजनौर जिले के कुछ हिस्सों को उत्तराखंड में शामिल कर पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का भूगोल बदलना चाहती है। इसके लिए उसने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

पहले कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत सार्वजनिक मंच से बिजनौर जिले के कुछ गांवों को उत्तराखंड में मिलाने की वकालत कर चुके हैं। अब तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वयं ही मैदान में उतर आए हैं।

कुछ दिन पूर्व सहारनपुर में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपना उत्तर प्रदेश प्रेम नहीं छिपा सकें। कहा कि वो सहारनपुर को उत्तराखंड में देखना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए प्रयास भी किए। मुख्यमंत्री की ये बात भले ही सहारनपुर वालों को अच्छी लगी हो। मगर, उत्तराखंड के लोग इसे पहाड़ के साथ सरकारी धोखा मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र िंसंह रावत का ये बयान यूं ही नहीं है। दरअसल, भाजपा इसके माध्यम से उत्तराखंड के लोगों का रिएक्शन जानना चाहती है। ताकि इसे देख समझकर अपने एजेंडे पर आगे बढ़ा जा सकें। संघ से जुड़े लोग तो अक्सर सहारनपुर को यूपी में मिलाने की बात करते रहे हैंं।

हालांकि ये बात भी सच है कि उत्तराखंड का जनमानस शायद ही इसे स्वीकार करे। इसको लेकर जिस प्रकार के रिएक्शन आ रहे हैं उससे तय है कि मुख्यमंत्री की बात लोगों के मन में चूभ गई है। इसका खामियाजा आने वाले दिनों में भाजपा को भुगतना पड़ेगा।

ये बात भाजपा भी जानती और समझती है। मगर, प्रचंड बहुमत के घमंड में चूर पार्टी पहाड़ के विरोध में काम करने से नहीं चूक रही है। बहरहाल, राज्य के लिए मरे-पीटे लोग मुख्यमंत्री के यूपी प्रेम को देख स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

कांग्रेस और भाजपा की पहाड़ विरोधी हरकतों से राज्य आंदोलन में सक्रिय लोग स्वयं को कोस रहे हैं। ये बात भी सामने आ रही है कि भाजपा गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी नहीं बनाना चाहती है। इसके लिए वो समय-समय पर अलग-अलग शिगूफे छोड़ती रही है। विपक्ष में रहकर गैरसैंण के पक्ष में बोलने वाली भाजपा ने सत्ता में आने के बाद टोन ही बदल दिया है।

गैरसैंण के पक्ष में बन रहे माहौल से घबराई भाजपा मैदान की राजनीति करने लगी है। ताकि पहाड़ के गुस्से की भरपाई मैदान में जी जा सकें। सहारनपुर को राज्य में मिलाने की वकालत इसी बात का हिस्सा है।
                                                                                                                                               लेखक उक्रांद के केंद्रीय सचिव हैं।

 

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