दिसा ध्याणियों को स्वयं न्योतते हैं गुरू चौरंगी नाथ
तीर्थ चेतना न्यूज
उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के गाजणा और चौंदियाकोट क्षेत्र के देवता गुरू चौरंगी नाथ हर तीसरे साल लगने वाले मेले के लिए क्षेत्र की दिसा-ध्याणियों ( क्षेत्र की विवाहित बेटियां) को स्वयं आमंत्रित करते हैं।
देवभूमि उत्तराखंड प्राकृतिक रहस्यों और यहां की खास परंपराओं के लिए पहचाना जाता है। यहां के लोगों का अपने अराध्यों के प्रति अटूट विश्वास है। समय-समय पर इस विश्वास को मजबूत करते तमाम चमत्कार यहां दिख और महसूस किए जा सकते हैं। इससे जुड़ी अनोखी परंपरा इसे खास बनाती हैं।
ऐसा ही कुछ है उत्तरकाशी जिले के गाजणा और चौंदियाकोट क्षेत्र के देवता गुरू चौरंगी नाथ। हर तीन साल में एक बार यहां मेला आयोजित होता है। गुरु चौरंगी नाथ क्षेत्र की दिसा-ध्याणियों को स्वयं मेले के लिए आमंत्रित करते हैं। बताया जाता है कि देवता दिसा-ध्याणियों के सपने में या अन्य प्रकार के संकेतों से उन्हें मेले मंे न्योतते हैं।
क्षेत्र की दिसा ध्याणियों पर देवता की बड़ी कृपा होती है। चौरंगीनाथ मेला’ गाजणा क्षेत्र के चौंदियाट गाँव और आसपास के पाँच गाँवों (दिखोली, सौंड, लोदाड़ा, और भटियारा) में यह मेला उत्तराखंड की अनूठी परंपरा और संस्कृति का एक अद्भुत संगम है।
पौराणिक और पारंपरिक यह एक प्राचीन और पारंपरिक ’पाँच दिवसीय’ मेला है, जिसमें स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। हलवा देवता का पशवा मेले का मुख्य आकर्षण गुरु चौरंगीनाथ के साथ चलने वाले वीर हलवा देवता का पशवा (देवता का अवतार माने जाने वाले व्यक्ति) होता है।
बिच्छू घास का आशीर्वाद एक अनोखी परंपरा के तहत, कुछ क्षेत्रों में देवता के पशवा बिच्छू घास से आशीर्वाद देते हैं। खास बात ये है कि इस मेले के लिए क्षेत्र की दिसा ध्याणियां दूर देश से भी मायके पहुंचती हैं।
ग्राम भेटीयारा की दिसा ध्याणी गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, उत्तरकाशी में जंतु विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. मधु थपलियाल बताती हैं कि क्षेत्र की दिसा ध्याणियों और उनके परिवार पर गुरू चौरंगी नाथ की विशेष कृपा होती है।
