राजकीय शिक्षक संघ के चुनाव की सरगरमियां तेज

राजकीय शिक्षक संघ के चुनाव की सरगरमियां तेज

chuanvराजकीय शिक्षक संघ के चुनाव को लेकर सरगरमियां तेज हो गई हैं। संघ के चुनाव में पहली बार शिक्षकों के परिष्कृत मुददे सामने आ रहे हैं।

अक्तूबर में प्रस्तावित राजकीय शिक्षक संघ की प्रांतीय चुनाव को लेकर शिक्षक राजनीति गरमाने लगी है। इस बार के चुनाव में शिक्षक नेताओं को खासा पसीना बहाना पड़ेगा। कारण शिक्षकों के तमाम समूह अपनी-अपनी मांगों को लेकर अक्रामक रूख अपना चुके हैं।

इसके अलावा संवर्गीय, वरिष्ठता, प्रमोशन से संबंधित बेहद पेचदगी भरे मुददों को लेकर आम शिक्षक सवाल खडे़ कर रहा है। कुछ मुददे ऐसे हैं जिन पर विभाग के आलाधिकारी भी जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।

शिक्षक संगठन के स्तर से उक्त मुददों को समझने और निस्तारण करने का शायद ही अभी तक कोई होमवर्क किया हो। परिणाम प्रभावित शिक्षक अब शिक्षक नेताओं का तकाजा का रहे हैं। गंभीर आरोप भी लग रहे हैं।

यही नहीं कुछ मुददों को लेकर शिक्षकों के समूह तक डेवलेप हो चुके हैं। वो इस चुनाव में प्रभावी भूमिका के माध्यम से मांगों को सक्षम मंच तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे शिक्षक नेताओं को लेकर ये चुनाव काफी टफ रहने वाला है।

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