पीजी कॉलेज, डाकपत्थर ः हिमालय, गंगा और उनके जल स्रोतः भारतीय जीवन का आधार

पीजी कॉलेज, डाकपत्थर ः हिमालय, गंगा और उनके जल स्रोतः भारतीय जीवन का आधार
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डाकपत्थर। गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, डाकपत्थर में हिमालय, गंगा और उनके जल स्रोत विषय पर आयोजित गोष्ठी में हिमालय और उससे जुड़ी राशियों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया गया।

नमामि गंगे योजना के अंतर्गत आयोजित गोष्ठी का राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बतौर मुख्य अतिथि शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हिमालय एवं उससे जुड़ी राशियों के संरक्षण की जरूरत है। ताकि इनका दीर्घकालनीन उपयोग संभव हो सकें।

पूर्व सीएम रावत ने गोष्ठी के माध्यम से गंगा के संरक्षण और संवर्द्धन का संदेश दिया। की स्वच्छता हेतु स्पष्ट संदेश दिया। विशिष्ट अतिथि विकासनगर के विधायक माननीय मुन्ना सिंह चौहान द्वारा हिमालय को नदियों के उद्गम हेतु सर्वश्रेष्ठ स्थान बताया गया और जल संरक्षण हेतु हिमालय के संरक्षण पर विशेष रूप से बल दिया गया।

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी पी ध्यानी ने वैश्विक स्तर पर हिमालय एवं उससे जुड़े जल स्रोतों पर हो रहे शोध के बारे में विस्तृत जानकारी दी एवं अधिक से अधिक इस विषय पर कार्य करने हेतु छात्र छात्राओं का आह्वान किया।

प्रो. डी सी नैनवाल, ने पानी को शुद्ध बनाए रखने के लिए हिमालय एवं उसके आसपास के जल स्रोतों पर ध्यान देने पर अपने विचार प्रकट किए। उदघाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. जीआर सेमवाल ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। प्रो. आर एस गंगवार द्वारा मुख्य अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। संचालन डॉ अरविंद कुमार अवस्थी द्वारा किया गया।

डॉ दीपक भट्ट के द्वारा जल स्रोतों और उनके संरक्षण और संवर्द्धन की चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संतोष कुमार राय, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन स्टडीज ने उत्तराखंड की नदियों से निकलने वाले अवसाद और इससे होने वाले लाभो पर विशेष रूप से चर्चा परिचर्चा की।

उन्होंने बताया गंगा के पानी से कैल्शियम कार्बोनेट की प्राप्ति होती है और उत्तराखंड से निकलने वाले जल स्रोतों के द्वारा मैदानी क्षेत्रों में उपजाऊ जमीन की मिट्टी और ताकतवर हो जाती है। डॉ शिवानी बड़थ्वाल ने बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन एंड गंगा रिजूवनेशन पर अपना व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से जीव जंतुओं के संरक्षण एवं उनकी घटती संख्या पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

उन्होंने गंगा को निर्मल बनाने एवं जंगल बचाने पर जोर दिया, जिससे स्वाभाविक रूप से नदिया भी बचाई जा सकती है। जलीय जीव की मौजूदगी से ही नदी स्वच्छ है या नहीं इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।

गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, रायपुर की जंतु विज्ञान विभाग की प्रमुख डा. मधु थपलियाल, द्वारा लघु फिल्म ’स्वच्छता और पानी’ के माध्यम से गंगा बचाव हेतु जागरूक संदेश दिया गया।

तकनीकी सत्र की रिपोर्टिंग डॉ दीप्ति बगवाड़ी द्वारा संपन्न की गई एवं सत्रीय धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया गया। अंत में कार्यक्रम के समन्वयक डॉ आर पी बडोनी द्वारा समस्त महाविद्यालय परिवार के सदस्यों, मुख्य वक्ताओं, मुख्य अतिथियों एवं छात्र छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

संगोष्ठी में प्राध्यापक वर्ग में डॉ विजय सिंह नेगी, डॉ राखी डिमरी, डॉक्टर आशाराम बिजलवान, डॉ विनोद रावत, डॉ दिलीप भाटिया, डॉ योगेश भट्ट, डॉ पूरन सिंह चौहान, डॉ. पूजा राठौर, डॉ राजकुमारी भंडारी, डॉ माधुरी रावत, डॉ राकेश कुमार जोशी, डॉ. एस के कुडीयाल, डॉ. पूजा राठौर, डॉ. पूजा पालीवाल, श्रीमती भावना गर्ग, डॉ रुचि बहुखंडी, डॉक्टर अमित गुप्ता, डॉक्टर निरंजन प्रजापति, डॉ अशोक कुमार, डॉ रुचि बडोनी, डॉक्टर श्वेता पांडे, डॉ जयश्री थपलियाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, मनमोहन सिंह, शूरवीर दास, राजेश वर्मा, श्रीमती शीतल, श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, दीपक एवं आवेश आदि उपस्थित रहे।

Tirth Chetna

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