शिक्षक का जिज्ञासु होना अनिवार्यः प्रो. कल्पना पंत

शिक्षक का जिज्ञासु होना अनिवार्यः प्रो. कल्पना पंत

- in टिहरी
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थत्यूड़। एक अच्छे शिक्षक होने की पहले शर्त उसका जिज्ञासु होना है। जिज्ञासु शिक्षक ही समाज को सकारात्मक दिशा और बदली हुई परिस्थितियों में आगे बढ़ने का जज्बा दे सकता है।

ये कहना है गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, थत्यूड़ की प्रिंसिपल प्रो. कल्पना पंत का। प्रो. पंत कॉलेज में प्रसार व्याख्यानमाला के अंतर्गत आत्म विकास विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोल रही थी। कहा कि बेहतर राष्ट्र के निर्माण के लिए एक विजनरी शिक्षक का होना अनिवार्य है।

अतः प्रत्येक शिक्षक का यह दायित्व है कि वह निरंतर पठन-पाठन, स्वाध्याय एवं प्रतिदिन नए प्रयोगों के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखारते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें क्योंकि यदि कुछ इंजीनियर खराब होंगे तो कुछ पुल टूटेंगे कुछ पुर्जे- कुछ डॉक्टर खराब होंगे तो कुछ जानें जाएंगी लेकिन यदि शिक्षक खराब होंगे तो पूरे राष्ट्र का निर्माण अवरुद्ध होगा।

मौजूदा दौर का जिक्र करते हुए कहा कि समय बहुत तेजी से बदल रहा है बदलते हुए समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अध्यापक को निरंतर स्वयं को अपडेट करते रहना आवश्यक है।

मुख्य वक्ता के रूप में महाविद्यालय के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पंकज पांडे ने कहा कि बदलती हुई परिस्थितियों के अनुसार कार्य करने के लिए निरंतर आत्म विकास करने की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने आत्म विकास की परिभाषा वर्तमान समय में उसकी आवश्यकता तथा छात्रों को निरंतर प्रोत्साहित करने के लिए छात्र के आत्म विकास पर बल दिया। आयोजन व्याख्यानमाला प्रभारी डॉ राजेश सिंह के निर्देशन में किया गया ।

व्याख्यान माला में डॉ. अनिल कुमार, डॉ शशि बाला, डॉ. संदीप कश्यप बिट्टू सिंह सुनील चौहान डॉ अंचला नौटियाल संदीप शर्मा महेशी बिष्ट गीता पवार डॉक्टर नीलम आदि मौजूद थे।

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