तराई के इतिहास का हो विस्तृत अध्ययनः डा. रमेश प्राणेश

तराई के इतिहास का हो विस्तृत अध्ययनः डा. रमेश प्राणेश

सितारगंज। उत्तराखंड के तराई क्षेत्र के इतिहास पर विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। शोधार्थियों को इसके लिए आगे आना चाहिए। इससे क्षेत्र के इतिहास के बारे में आम लोगों तक संपूर्ण जानकारी पहुंच सकेगी ।

ये कहना मानव विज्ञानशास्त्री डा. रमेश प्राणेश का। डा. प्राणेश गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, सितारगंज में इतिहास विभाग द्वारा आयोजित गेस्ट लेक्चर में बोल रहे थे। मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने कहा कि कि उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के तराई क्षेत्र का बहुत उज्ज्वल इतिहास है, जिस पर अध्ययन किये जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में भी वह सितारगंज तथा नानकमत्ता के क्षेत्र में थारू जनजाति पर सर्वेक्षण के उद्देश्य से आये हैं। वह पहले भी एक यात्रा कर चुके हैं तथा पुनः उसपर कार्य प्रारंभ करने जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ मजूमदार ने भी तराई में रहने वाली थारू जनजाति पर शोध किया है।

इतिहासकार, मानव विज्ञानशास्त्री एवम साहित्यकार डॉ प्राणेश ने उधम सिंह नगर के तराई क्षेत्र के इतिहास की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने यह भी बताया कि हुएनसांग भी काशीपुर से होते हुए सितारगंज के तराई क्षेत्र से गुजरे थे।

उन्होंने बताया कि उनकाखानाबदोशों के साथ अधिकतर समय बीता है और इन समुदायों को इतिहास की मुख्यधारा में जोड़ने की विशेष आवश्यकता है । साथ ही उन्होंने कहा उन्होंने कहा कि ज्ञान सिर्फ विषय केंद्रित नहीं होता अपितु उसे अंतर विषयक होना चाहिए।

इसीलिए एक शोधार्थी को सभी विषयों का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। प्रिंसिपल प्रो. सुभाष वर्मा ने कहा कि डा. प्राणेश का धन्यावाद एवं आभार व्यक्त किया। इतिहास विभाग की प्रभारी डा. अनिता नेगी ने सभी का आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर डा. राजविंदर कौर ,डॉ. सत्य मित्र सिंह, डॉ. कमला उपाध्याय, डॉ. सविता रानी, डॉ चारू चंद्र उप्रेती, डॉ भुवनेश कुमार, डॉ वंदना बंसल, डॉ नीति चौहान आदि उपस्थित रहे।

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