जीजीआईसी बुग्गावालाः शिक्षिकाएं पढ़ाएं या बाबू का काम करें

जीजीआईसी बुग्गावालाः शिक्षिकाएं पढ़ाएं या बाबू का काम करें

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हरिद्वार। चार सौ से अधिक छात्रा संख्या वाले राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बुग्गावाला में न तो बाबू है और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। ऐसे में सवाल उठता है कि शिक्षिकाएं पढ़ाएं या बाबू का काम करें।

हरिद्वार जिले के भगवानपुर ब्लॉक का राजकीय बालिका इंटर कालेज बुग्गावाला शिक्षा विभाग की उपेक्षा का शिकार है। चार सौ से अधिक छात्रा संख्या वाले इस स्कूल में लिपिक वर्ग में तीन स्वीकृत पदों में से एक पर भी तैनाती नहीं है।

यही हाल चार स्वीकृत चतुर्थ श्रेणी के पदों का भी है। बाबू का काम शिक्षिकाओं को ही करना पड़ता है। ये क्रम पांच सालों से चल रहा है। स्कूल का तमाम अनुरोधों पर भी विभागीय अधिकारी और सरकार गौर करने को तैयार नहीं है।

बाबू और चतुर्थ श्रेणी कर्मी न होने का असर स्कूल की व्यवस्थाओं पर साफ देखा जा सकता है। विभागीय अधिकारी हर सूचना का तत्काल जवाब की अपेक्षा रखते हैं। सूचनाओं के जवाब, प्रेषण और कभी कभार ब्लॉक और जिले के चक्कर भी शिक्षिकाओं को ही काटने पड़ते हैं।

शिक्षणेत्तर कार्यों के बाद भी स्कूल की शिक्षिकाओं ने पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया। स्कूल का बोर्ड रिजल्ट इस बात का प्रमाण है।

खंड शिक्षाधिकारी बी. सिंह ने स्वीकार किया कि जीजीआईसी बुग्गावाला में ऐसी स्थिति है। बाबू का कार्य शिक्षिकाएं ही करती हैं। उनका कहना है कि हाल के सालों में स्थापित इंटर कालेजों में लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के स्वीकृत पद आउट सोर्स एजेंसी से भरे जाने हैं।

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